पंजाब सरकार ने राजस्व बढ़ाने के मकसद से खेतीबाड़ी के अलावा नहरी पानी के किसी अन्य प्रयोग पर लगने वाले चार्ज (शुल्क) को बढ़ाने का फैसला किया है। कैबिनेट ने हरियाणा की तर्ज पर चार्ज करने को मंजूरी दी। नहरों व नदियों से थर्मल पॉवर प्लांट, इंडस्ट्री, नगर निगम आदि पानी लेते हैं। इसी तरह बेवरेजेज व बॉटल वाटर इंडस्ट्री, रेलवे और आर्मी को पीने के पानी की सप्लाई, मछली पालने के तालाब, ईंटें और भवन निर्माण में भी नहरी पानी की काफी जरूरत पड़ती है।
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि नहरी नेटवर्क की मेंटेनेंस के लिए यह फैसला लिया गया। इससे राजस्व 24 से 319 करोड़ प्रति वर्ष पहुंचने की उम्मीद है। नहरी नेटवर्क राज्य में 14,500 किलोमीटर में फैला हुआ है। समय के साथ इसकी हालत खराब हो गई है। ज्यादातर डिस्ट्रीब्यूटरी और माइनर्स 30-40 साल पहले 1980 के दशक में बनाई गई थीं। इन्हें अच्छे ढंग से चलाने के लिए साल में दो बार सफाई की जरूरत है ताकि आखिरी छोर तक पानी जा सके।
राजस्व विभाग में नियुक्त होंगे 1090 पटवारी
पंजाब कैबिनेट ने राजस्व विभाग में 1090 पटवारियों की नियुक्ति को हरी झंडी दी है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि राज्य प्रशासन में राजस्व विभाग का अहम रोल है जिसमें जमीन रिकॉर्ड कंपाइल, मेंटेन और अपडेट करने में पटवारियों की अहम भूमिका होती है। इन नियुक्तियों से लोगों को सुविधा मिलेगी। कैबिनेट ने सात पटवारी सर्किल पर एक कानूनगो नियुक्त करने को भी मंजूरी दी। अब तक दस पटवारी सर्किल पर एक कानूनगो होता था। इस तरह कानूनगो के 34 नए पद सृजित होंगे। ब्यूरो
गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए वाटर रेगुलेशन व डेवलपमेंट अथॉरिटी बनेगी
गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए पंजाब सरकार सक्रिय हो गई है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में हुई कैबिनेट की मीटिंग में बुधवार को इसके लिए वाटर रेगुलेशन व डेवलपमेंट अथॉरिटी स्थापित करने का फैसला लिया गया। यह अथॉरिटी जल स्रोतों का इस्तेमाल अच्छे ढंग से करने में अहम भूमिका निभाएगी। हिदायतों का पालन न करने पर अथॉरिटी दंड लगा सकेगी। इसे सिविल कोर्ट की शक्तियां हासिल होंगी। हालांकि यह पीने, घरेलू व खेती उपयोग के लिए पानी की निकासी के मामले में कोई दखल नहीं देगी।