पंजाब में 13 सीटों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी सीटों पर प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस बार किसी भी राजनीतिक दल का गठबंधन न होने के चलते अधिकतर सीटों पर मुकाबला चौकोना होने वाला है। कहीं-कहीं यह पांचकोणीय भी है।
जालंधर का हाल
चुनाव से कुछ दिन पहले ही मोहिंदर सिंह केपी ने कांग्रेस को झटका देकर शिरोमणि अकाली दल का हाथ थाम लिया था। शिअद ने केपी पर भरोसा जताया और उनको जालंधर से उम्मीदवारी भी सौंप दी। वह तीन बार के विधायक हैं और राज्य में दो बार मंत्री भी रह चुके हैं। 2009 लोकसभा चुनाव में जालंधर से सांसद चुने गए थे, लेकिन 2014 में होशियारपुर से हार गए थे। इस बार जालंधर में उनका मुकाबला कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी, आम अदमी पार्टी के पवन कुमार टीनू और भाजपा के सुशील कुमार रिंकू से होगा। रिंकू व टीनू खुद पाला बदलकर इस बार चुनावी अखाड़े में उतरे हुए हैं। सुशील रिंकू चुनाव से पहले ही आप को अलविदा कहकर भाजपा में शामिल हो गए थे। यहां तक कि आप ने उनको जालंधर से अपना प्रत्याशी भी घोषित कर दिया था, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने भाजपा में जाने का फैसला लिया और इसी सीट से ही भाजपा की उम्मीदवारी भी हासिल कर ली। इसी तरह वर्ष 2022 में अकाली दल से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले पवन टीनू हाल ही में आप में शामिल हो गए थे और आप ने भी उनको जालंधर से ही चुनाव मैदान में उतार दिया था।
परनीत व गांधी ने भी बदला पाला
कैप्टन अमरिंदर सिंह पत्नी सांसद परनीत कौर भी हाल ही में भाजपा में शामिल हो गई थीं, जिसके बाद ही पटियाला से भाजपा ने उनको अपना प्रत्याशी भी बना दिया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव उन्होंने पटियाला से ही कांग्रेस की ही सीट पर चुनाव जीता था। वहीं, परनीत के सामने कांग्रेस की तरफ से धर्मवीर गांधी चुनाव में उतरे हैं। गांधी ने वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव आप से लड़ा था और जीत दर्ज की थी। वर्ष 2016 में उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी। बाद में पंजाब फ्रंट और फिर नवां पंजाब पार्टी भी बनाई और अब वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे, जिसके बाद ही कांग्रेस ने उनको पटियाला से अपनी टिकट थमा दी थी। परनीत व गांधी पिछले चुनाव में भी आमने-सामने हो चुके हैं, इसलिए पटियाला सीट पर इस बार भी मुकाबला कड़ा रहने वाला है। पटियाला से आप से मंत्री डॉ. बलवीर सिंह सिद्धू और शिअद से एनके शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं, जिसके चलते यहां मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
गुरप्रीत सिंह जीपी व बिट्टू ने भी बदली पार्टी
पूर्व विधायक गुरप्रीत सिंह जीपी ने भी कांग्रेस में अनुशासन न होने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद ही वह आप में शामिल हुए थे और आप ने उनको फतेहगढ़ से चुनाव मैदान में उतारा है। जीपी वर्ष 2017 में बस्सी पठाना विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए थे। इस लोकसभा चुनाव में फतेहगढ़ से उनका मुकाबला मौजूदा सांसद कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अमर सिंह, शिअद के बिक्रमजीत खालसा व भाजपा के गेजा राम वाल्मीकि से होगा।
इसी तरह लुधियाना से मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए थे। भाजपा ने लुधियाना से ही उनको अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। यही कारण है कि लुधियाना में भी इस बार मुकाबला रोचक रहने वाला है। कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग खुद बिट्टू के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए हैं। कांग्रेस से टिकट की घोषणा के साथ ही वड़िंग ने यहां तक कह दिया कि उनकी इस बार लड़ाई दलबदलुओं से है। लुधियाना में बिट्टू व वड़िंग का मुकाबला शिअद के रणजीत सिंह और आप के अशोक पराशर पप्पी से होगा। पप्पी लुधियाना सेंट्रल हलके से विधायक हैं।
चब्बेवाल, यामिनी व मन्ना भी लिस्ट में
दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ने वालों की लिस्ट में डॉ. राजुकुमार चब्बेवाल, मनजीत सिंह मियाविंड और यामिनी गोमर का नाम भी शामिल हैं। डॉ. राजकुमार चब्बेवाल चुनाव से पहले ही कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं और पार्टी ने उन्हें होशियारपुर से अपना प्रत्याशी भी बना दिया। उन्होंने पिछला चुनाव कांग्रेस की टिकट पर होशियारपुर से ही लड़ा था, लेकिन वह भाजपा के सोमप्रकाश से हार गए थे। 2022 में विधानसभा चुनाव में वह चब्बेवाल हलके से जीत दर्ज करके विधानसभा पहुंचे थे। इस बार उनका मुकाबला भाजपा से केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश की पत्नी अनिता सोमप्रकाश, शिअद के सोहन सिंह ठंडल और कांग्रेस से यामिनी गोमर से होगा।
गोमर ने 2014 लोकसभा चुनाव इसी सीट पर आप से लड़ा था, लेकिन वर्ष 2016 में वह आप छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गई थी। इसी तरह खडूर साहिब से भाजपा प्रत्याशी मनजीत मन्ना मियाविंड का शिअद से नाता रहा है, लेकिन गत वर्ष उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। एक पंथक छवि होने के चलते भाजपा ने उनको चुनाव मैदान में उतारा है, क्योंकि इस सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक कुलबीर जीरा, आप प्रत्याशी मंत्री लालजीत भुल्लर, शिअद प्रत्याशी टकसाली नेता व पूर्व विधायक विरसा सिंह वल्टोहा और वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह से होगा। यही कारण है कि इस सीट पर भी चुनावी नतीजे दिलचस्प रहने वाले हैं, क्योंकि शिअद अमृतसर ने भी अमृतपाल को अपना समर्थन देने का फैसला लिया है और इस सीट पर उन्होंने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
ये नेता भी चुनाव के दौरान इधर से उधर गए
कई नेता ऐसे हैं, जो चुनाव के दौरान पार्टी बदलकर इधर से उधर चले गए हैं। रविवार को ही बैंस ब्रदर्स बलविंदर सिंह बैंस और सिमरजीत सिंह बैंस कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसी तरह संगरूर सीट पर टिकट कटने से नाराज पूर्व विधायक दलवीर सिंह गोल्डी भी कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने इस सीट पर विधायक सुखपाल खैरा को चुनाव मैदान में उतारा था, जिसके चलते ही पार्टी से गोल्डी की नाराजगी चल रही थी। इसी तरह जालंधर से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को टिकट मिलने के चलते पूर्व सांसद स्वर्गीय संतोख सिंह चौधरी की पत्नी करमजीत कौर ने भी भाजपा का दामन थामने का फैसला लिया। इसके बाद ही कांग्रेस ने उनके बेटे विधायक विक्रमजीत सिंह पार्टी विरोधी गतिविधियां का हवाला देकर पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसी तरह विजय सांपला के करीबी रिश्तेदार रॉबिन सांपला ने भी भाजपा छोड़कर आप का दामन थाम लिया था।