पीड़िता के मुताबिक आरोपी संदीप सिंह से बचने के दौरान उसका सिर टेबल से टकरा गया था, जिससे उसे चोट आई थी। वहीं, कुछ गवाहों के बयान से निकल कर आया कि मंत्री संदीप सिंह समेत खेल विभाग के अन्य कर्मियों द्वारा पीड़िता का मानसिक शोषण किया जा रहा था। वहीं, खेल विभाग के कर्मियों के बयान व ऑफिस रिकॉर्ड से पता चला कि किसी प्रभाव के चलते पीड़िता की नियुक्ति में देरी हो रही थी और उसका तबादला पंचकूला से झज्जर किया जा रहा था।
पीड़िता से सोशल मीडिया पर चैट को कबूला
चार्जशीट के मुताबिक पीड़िता के मोबाइल के स्क्रीनशॉट संदीप सिंह को दिखाने पर उन्होंने माना था कि उनकी और पीड़िता की स्नैपचैट पर बात हुई थी। वहीं, एफआईआर दर्ज होने से तीन दिन पहले 28 दिसंबर 2022 की एक कॉल रिकार्डिंग में भी संदीप सिंह ने माना कि उसमें पीड़िता और उसकी आवाज है। मंत्री के मुताबिक एक जुलाई 2022 को उनके सेक्टर-7 स्थित सरकारी आवास पर एक संतरी के अलावा तीन से चार सुरक्षाकर्मी और तीन से चार किचन स्टाफ/ कुक मौजूद थे।
नियुक्ति में अनुचित देरी की बात आई सामने
चैट से इस बात की तस्दीक हुई कि संदीप सिंह ने पीड़िता को सरकार की ओएसपी पॉलिसी के तहत नियुक्ति में सहायता करने का ऑफर दिया था। जांच में यह भी पता चला कि जूनियर कोच की नियुक्ति में अनुचित देरी की गई। सीएफएसएल रिपोर्ट में कोच के मोबाइल फोन की जांच से इंगित होता है कि मंत्री और पीड़िता दोनों आपस में नियमित रूप से संपर्क में थे और उनका रिश्ता प्रोफेशनल बातचीत से आगे था। हालांकि संदीप सिंह ने इससे इंकार किया था। चार्जशीट में पुलिस ने कहा है कि चैट के स्क्रीनशॉट को लेकर संदीप सिंह ने झूठ बोला, जिससे प्रतीत होता है कि जांच के दौरान ईमानदार नहीं थे।
संदीप सिंह के बयान में दिखा मतभेद
पुलिस के मुताबिक संदीप सिंह ने अपने बयान में कहा कि पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर दो मार्च 2022 और स्नैपचैट पर एक जुलाई 2022 को मिलने के लिए समय मांगा था। वहीं स्टाफ के मुताबिक मंत्री ने पीड़िता को ऑफिस टाइम में न बुलाकर निजी रूप से मिलने बुलाया था। पुलिस के मुताबिक संदीप सिंह के विरोधाभासी बयान सामने आए।
रिप्रेजेंटेशन में संदीप सिंह ने कहा कि वह पहली बार पीड़िता से मार्च-अप्रैल 2022 में ताऊ देवी लाल स्टेडियम में मिले थे जबकि बयान में कहा कि मार्च में वह अपने घर पर पीड़िता से मिले थे। ये भी कहा कि पीड़िता ने उनके पीए से 31 दिसंबर 2021 को बात की थी, मगर बयान में कहा कि इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। संदीप सिंह यह भी नहीं बता पाए कि उन्होंने पीड़िता को मिलने के लिए ऑफिस टाइम छोड़कर देर शाम क्यों बुलाया था?
चैट रिकॉर्ड न मिलने से कई आरोप सिद्ध नहीं हुए: पुलिस
पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में पीड़िता के कुछ आरोप जांच के दौरान सिद्ध नहीं हो पाए। पुलिस ने कहा है कि स्नैपचैट पर दोनों के बीच नियमित रूप से बातचीत होती थी। स्नैपचैट का डाटा न निकल पाने के चलते पीड़िता के कई आरोप तकनीकी दिक्कतों के चलते साबित नहीं हो सके। वहीं पीड़िता की कई गवाहों से हुई चैट से सामने आया है कि वह काफी मानसिक तनाव में थी। उसने आरोप लगाया था कि संदीप सिंह ने उसके लिए विपरीत माहौल पैदा कर दिया है।
पीड़िता के मुताबिक आरोपी ने उसका विश्वास जीतने के लिए उसकी नियुक्ति में मदद का प्रस्ताव दिया ताकि वह उससे यौन लाभ पा सके। पुलिस ने कहा है कि मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी के पीछे तर्क दिया है कि संबंधित घटनाक्रम और पुलिस शिकायत देने में छह महीने का अंतराल था। बता दें कि पुलिस ने मामले में संदीप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 354, 354ए, 354बी, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था।