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पंजाब में बड़ा सियासी फेरबदल, जल्द होगा दो पार्टियों का मर्जर

Wed, 13 Jan 2016 08:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब में बड़ा सियासी फेरबदल होने जा रहा है। पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब कांग्रेस में मर्ज होगी और मनप्रीत बादल कांग्रेस ज्वॉइन करेंगे। पीपीपी सुप्रीमो मनप्रीत बादल ने स्वीकार किया कि कांग्रेस के साथ उनकी बातचीत अंतिम दौर में है। पार्टी नेताओं से सलाह-मशविरा करने के बाद ही वह मर्जर पर फैसला करेंगे।
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जानकारी के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पदभार संभालते ही पंजाब में भी बिहार की तरह महागठबंधन बनाने का ऐलान किया था। इसे लेकर कैप्टन और मनप्रीत की बात भी हो चुकी है। अब मनप्रीत पीपीपी के स्तर पर जहां नेताओं की राय ले रहे हैं, वहीं अपने सहयोगियों को इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार करने में भी जुटे हैं। पिछले दिनों से मनप्रीत पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं।

उन्होंने मुक्तसर में पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। मनप्रीत ने पहली बार स्वीकार किया कि कांग्रेस के साथ जाने पर वह पार्टी की सेंट्रल कमेटी के साथ सलाह के बाद ही फैसला लेंगे। मर्जर कब होगा, के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी सलाह-मशविरा कर रहे हैं, इसलिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। यह कहना भी गलत होगा कि वह पीपीपी के कांग्रेस में मर्जर की तैयारी कर रहे हैं। जब बात सिरे चढ़ेगी तो वह खुद खुलासा करेंगे।
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मनप्रीत ने कहा कि कांग्रेस को पीपीपी के एजेंडे के प्रति गंभीर होना पड़ेगा। पीपीपी बादल सरकार के वीआईपी कल्चर के खिलाफ है। लोगों से जुड़े मुद्दों पर भी पार्टी का एक एजेंडा है। वर्करों की भावनाएं भी हैं। इन सभी बातों पर विचार चल रहा है। माघी मेले में कांग्रेस में शामिल होने के ऐलान को नकारते हुए मनप्रीत ने कहा कि वह माघी कांफ्रेंस में हिस्सा नहीं लेंगे।

पीपीपी के आम आदमी पार्टी के साथ जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि 2014 के लोक सभा में उन्होंने यह कोशिश की थी। पर आप का संविधान इसकी इजाजत नहीं देता था। अब पार्टी के कुछ नेता नहीं चाहते कि वह आप के साथ जाएं।

2012 में कैप्टन थे खिलाफ
मनप्रीत बादल 2012 के विधानसभा चुनाव में ही कांग्रेस के साथ मिल कर लड़ना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए कोशिश भी की थी। पर तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह इसके लिए तैयार नहीं थे। इसका खामियाजा दोनों पार्टियों को भुगतना पड़ा। पीपीपी करीब पांच फीसदी वोट ले गई, सीट कोई नहीं मिली। कांग्रेस को कई सीटें गंवानी पड़ी।
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