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Chandigarh News: मुठभेड़ में घायल मनीष पर बदमाशों को पनाह देने और पुलिस से सेटिंग के आरोप

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चंडीगढ़। सेक्टर-52 में पुलिस मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से घायल मनीष पुलिस के लिए नया नाम नहीं है। पुलिस जांच में उसका नाम बदमाशों को पनाह देने से लेकर उन्हें पुलिस की गिरफ्त से बचाने के लिए कथित तौर पर सेटिंग कराने तक सामने आ चुका है। अब मोहाली में कारोबारी के घर और जुबली वॉक के मालिक/पार्टनर के घर के बाहर हुई फायरिंग के आरोपियों को कजेहड़ी में पनाह देने के आरोप में भी उसका नाम जांच के दायरे में है। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग की सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद खरड़ सीआईए उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान सेक्टर-52 में घेराबंदी के दौरान मनीष ने पुलिस टीम पर गोली चलाई और जवाबी कार्रवाई में घायल हो गया। मनीष का पीजीआई में इलाज चल रहा है।
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मनीष पर इससे पहले मेरठ की करीब छह करोड़ रुपये की कैश वैन लूट के फरार आरोपियों गौरव और रॉकी को चंडीगढ़ में छिपाने का भी आरोप लगा था। दोनों कजेहड़ी के एक होटल में छिपे हुए थे। आरोप है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की गिरफ्त से बचाने के लिए मनीष ने तत्कालीन डीसीसी इंचार्ज इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह से सेटिंग की थी। जांच में दोनों आरोपियों को बचाने के लिए उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट का फर्जी केस दर्ज कराने की बात भी सामने आई थी।
मामला आगे बढ़ने पर तत्कालीन डीसीसी इंचार्ज इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। तीनों फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
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मोहाली फायरिंग के बाद पुलिस की नजर में आया
पुलिस के अनुसार, फेज-10 में कारोबारी के घर और जुबली वॉक के मालिक/पार्टनर के घर के बाहर फायरिंग करने वाले आरोपियों को मनीष ने कथित तौर पर पनाह दी थी। सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद खरड़ सीआईए ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। पुलिस के मुताबिक, सेक्टर-52 में घेराबंदी के दौरान मनीष ने पहले गोली चलाई। जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी। अब पुलिस उसके पुराने संपर्कों और वर्तमान गतिविधियों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि बदमाशों को पनाह देने और पुलिस सेटिंग से जुड़े मामलों में उसकी भूमिका कितनी रही है और उसका आपराधिक नेटवर्क कितना बड़ा है।
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