नृत्यांगना और कोरियोग्राफर पद्मश्री मलाविका सारुक्कई का पहला प्यार भरतनाट्यम है। उन्होंने आठ साल की उम्र से डांस शुरू किया था। 42 साल हो गए पर भरतनाट्यम की स्पिरिट कम नहीं हुई।
चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी द्वारा फिल्म अनसीन सीक्वेंस की स्क्रीनिंग के दौरान मलाविका सारुक्कई ने कहा कि कोरियोग्राफी के कई प्रकार होते हैं। उनकी व्याख्या करना काफी कठिन काम है।
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने भरतनाट्यम शुरू किया तो काफी मेहनत थी। उन्होंने कहा कि अब क्लासिकल के प्रति सभी की रुचि खत्म होती जा रही है। उन्होंने अनसीन सीक्वेंस के बारे में बताया कि यह कविता के माध्यम से आर्टिस्ट को दिखाने का एक मौका है।
उन्होंने कहा कि अनसीन सीक्वेंस के बनने के बाद उनके जीवन में परिवर्तन आए। उन्होंने कहा कि स्टेज और मूवी दोनों में अंतर काफी है। मूवी को बार-बार देखा जा सकता है और इसी वजह से इसका महत्व ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि इस मूवी को बनाने में 18 महीने लग गए हैं। उन्होंने कहा कि इस मूवी के माध्यम से उनकी बायोग्राफी नहीं दिखाई गई है बल्कि एक आर्टिस्ट और आर्ट को दिखाया गया है।
यह मिले अवार्ड
मलाविका सारुक्कई को पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी अवार्ड 2002, कालाएममानी अवार्ड मिल चुके हैं।
बढ़ावा देना चाहिए इसे
मलाविका सारुक्कई ने कहा कि क्लासिकल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। समाज का यह ट्रेडीशनल अंग है। युवाओं और बच्चों को क्लासिकल की शिक्षा लेनी चाहिए।
अनसीन सीक्वेंस की स्क्रीनिंग
समुंत्रा धोषाल द्वारा बनाई गई फिल्म अनसीन सीक्वेंस को जनवरी में लिंकोलन सेंटर में तीन बेस्ट फिल्मों में चुना गया। यह फिल्म मलाविका सारुक्कई और उनके आर्ट की कहानी है। फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन गुरचरण सिंह इस मौके पर मौजूद रहे।