श्री अकाल तख्त साहिब पर पांच सिंह साहिबान की हुई बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री व युवा अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को तनखइया घोषित कर दिया गया।
श्री गुरु गोबिंद साहिब की ओर से रचित शबद में अपनी मर्जी से तोड़ मरोड़ करने में मजीठिया को धार्मिक रूप में दोषी घोषित कर दिया गया। इस बैठक में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, हरिमंदिर साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह, तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलवंत सिंह नंदगढ़, तख्त केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल सिंह और श्री अकाल तख्त साहिब के ग्रंथी ज्ञानी गुरमुख सिंह खालसा शामिल हुए।
फैसले के अनुसार धार्मिक सजा
श्री अकाल तख्त साहिब में वीरवार को शाम तक चली बैठक के बाद मजीठिया को पांच सिंह साहिबान की ओर से लिए गए फैसले के अनुसार धार्मिक सजा सुनाई गई।
मजीठिया ने भी हाथ जोड़कर जत्थेदार से सुनाई गई धार्मिक सजा मंजूर कर ली। जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने हुकमनामा जारी करते हुए कहा कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने सिख पंथ की धार्मिक मर्यादा के खिलाफ जाते हुए गुरु साहिब की ओर से रचित शबद की लाइनों के साथ छेड़छाड़ करने की गलती की है।
मजीठिया को ये सजा भूगतनी होगी
पांच सिंह साहिबान की ओर से लिए गए फैसले के अनुसार मजीठिया को सभी तख्त साहिबों तख्त श्री हजूर साहिब, तख्त पटना साहिब, तख्त दमदमा साहिब और तख्त केस गढ़ साहिबों पर जाकर लंगर में धन की सेवा करनी और खुद हाथों में लंगर संगत को बरताना होगा।
इसके बाद मजीठिया को श्री अकाल तख्त साहिब पर आना होगा। यहां पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ शुरू करवाना होगा। तीन दिन तक यहां पर भी लंगर की सेवा करनी होगी। लंगर के लिए अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार धनराशि देनी होगी। इसी दौरान लंगर के बर्तन मांजने की सेवा करनी होगी। श्री अकाल तख्त साहिब पर 501 रुपये की आर्थिक भेंटा देनी होगी। इसके बाद 101 रुपये का कड़ाह प्रसाद करवा कर क्षमा याचना करनी होगी।
इधर एक और विवाद शुरू
बैठक के दौरान उस समय पशोपेश वाली स्थिति बन गई जब पांच सिंह साहिबान की बैठक में तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह भी पहुंचे।
उनको बैठक में हिस्सा नहीं लेने दिया गया। उनको यह कह कर वापस भेज दिया गया कि तख्त पटना साहिब की प्रबंधक कमेटी ने एक प्रस्ताव भेजा है कि तख्त पटना साहिब के जत्थेदार के पद से ज्ञानी इकबाल सिंह को हटा दिया गया है। ज्ञानी इकबाल सिंह तख्त पटना साहिब के अब जत्थेदार नहीं हैं।