राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर हम आपको बता रहे हैं, उनकी निजी जिंदगी से जुड़े 10 ऐसे राज, जिनके बारे में शायद ही किसी ने बताया हो। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को दुनिया भर में एक महान शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है। वे अपने आदर्शों और अहिंसा के पक्के थे। उन्हें न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी विशेष मान-सम्मान दिया जाता है। इस बात का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि दुनिया के महान वैज्ञानिकों में शुमार आइंस्टीन ने कहा था कि कुछ सालों बाद लोग इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि महात्मा गांधी जैसे शख्स दुनिया में थे।
गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया। देश के कई कोने ऐसे हैं, जहां से उनकी यादें जुड़ी हैं। ऐसी ही एक जगह हरियाणा में भी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि महात्मा गांधी को पांच बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। गांधी जी को सम्मान देने के लिए एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स गोल चश्मा पहनते थे। गांधी जी नकली दांत लगाते थे, जिसे वह अपने कपड़े में रखते थे। महात्मा गांधी हर रोज 18 किलोमीटर पैदल चलते थे। इस लिहाज से गांधी जी पुरी दुनिया के दो चक्कर लगा सकते हैं।
अपनी मौत से एक दिन पहले महात्मा गांधी कांग्रेस पार्टी को भंग करने पर विचार कर रहे थे। महात्मा गांधी की अंतिम यात्रा 8 किलोमीटर तक चली थी। गांधी जी के नाम से भारत में 53 मुख्य मार्ग हैं जबकि विदेशों में 48 सड़के हैं। गांधी जी के कपड़ों सहित उनकी कई वस्तुएं आज भी मदुरई के म्यूजियम सुरक्षित हैं। अपने पूरे जीवन में गांधी जी ने कभी कोई राजनीति पद नहीं लिया। जिस अंग्रेजी सरकार के खिलाफ गांधीजी ने आंदोलन किया उसी अंग्रेजी सरकार ने महात्मा गांधी की मौत 21 साल बाद उनके सम्मान में स्टांप जारी किया था।
गांधी जी ने बतौर सैनिक युद्ध में हिस्सा लिया था
महात्मा गांधी
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गांधी जी ने बोएर युद्ध में बतौर सैनिक हिस्सा लिया था। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी को 15 हजार डॉलर मिलते थे जो आजके तकरीबन 10 लाख रुपए के बराबर है। हरियाणा के अंतिम छोर पर बसे एक जिले पलवल से गांधी जी की बेहद खास याद जुड़ी है। स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए बनाए गए रोलेट एक्ट के खिलाफ गांधी जी रेलगाड़ी से जलियांवाला बाग अमृतसर गए थे। इस सफर के दौरान रास्ते में पलवल रेलवे स्टेशन पर ब्रिटिश सरकार ने 10 अप्रैल 1919 को बापू को पहली बार गिरफ्तार किया था। पलवल के इतिहास में ये अध्याय खास तौर से जुड़ गया।
उसके बाद 2 अक्टूबर 1938 को नेता जी सुभाष चंद्र बोस पलवल आए, तो उन्होंने गांधी जी की याद में एक स्मारक का शिलान्यास किया। उस स्मारक को आज गांधी सेवा आश्रम ट्रस्ट के नाम से जाना जाता है। करीब 5 एकड़ में फैले इस आश्रम में उनके बचपन से लेकर अंतिम सफर तक की कई चीजें संजो कर रखी गई हैं। इसलिए ट्रस्ट को लोग मिनी राजघाट का दर्जा भी देते हैं। गांधी सेवा आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष देवी चरण मंगला बताते हैं कि पलवल का वह स्टेशन आज खस्ता हाल में है और सरकारी स्तर पर उपेक्षा का शिकार है।
स्टेशन पर एक स्मारक बना है, जिसे दो अक्तूबर या 30 जनवरी को ही महत्व दिया जाता है। ऑफिस में न्यूजपेपर की कटिंग लगी है, जो उस समय की है जब बापू को गिरफ्तार किया गया था। गांधी जी का नाम जुड़ा होने के बावजूद पलवल को वह एतिहासिक महत्व नहीं मिला, जिसका वह हकदार है। यदि सरकार व प्रशासन इस ओर गंभीर हो, तो पलवल का नाम और रोशन हो सकता है।