पंचकूला। प्रवर्तन निदेशालय ने 400 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रियल एस्टेट फर्म एम3एम के प्रमोटर रूप कुमार बंसल को गिरफ्तार किया है। इसके बाद उसे पंचकूला के ड्यूटी मजिस्ट्रेट पीके लाल की अदालत में पेश किया जहां से उसे सात दिन का रिमांड मिला है। आरोपी से पैसे की बरामदगी और पैसे के इस्तेमाल को जानने के लिए ईडी ने रिमांड मांगा जिस पर अदालत ने सहमति दे दी। बंसल की गिरफ्तारी ईडी द्वारा दिल्ली और गुरुग्राम में रियल एस्टेट डेवलपर्स आईआरईओ ग्रुप और एम3एम ग्रुप के सात स्थानों पर चलाए गए तलाशी अभियान के बाद हुई है। अधिकारियों का कहना है कि इन फर्मों के खिलाफ कथित रूप से फंड डायवर्ट करने, गबन करने और हेराफेरी के आरोपों की जांच चल रही है। इतना ही नहीं ईडी ने आईआरईओ ग्रुप और एम3एम ग्रुप की ओर से 400 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का पता भी लगाया है।
आईआरईओ और एम3एम के ठिकानों पर हुई ईडी की छापेमारी में कई लग्जरी कारों सहित 5.75 करोड़ रुपये के आभूषण, 15 लाख नकद और विभिन्न दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और बही खाते जब्त किए गए थे। ईडी के मुताबिक, एम3एम ग्रुप के मालिक, कंट्रोलर और प्रमोटर बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल, पंकज बंसल और अन्य जानबूझकर जांच से बचते रहे। बता दें कि आईआरईओ समूह के खिलाफ दर्ज हुई कई एफआईआर को ध्यान में रखते हुए ईडी ने मामले जांच शुरू की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
एम3एम समूह ने किया था करोड़ों का गबन
जांच एजेंसी का कहना है कि एम3एम समूह के माध्यम से करोड़ों रुपये का गबन किया गया था। एम3एम ने शेल कंपनियों के माध्यम से आईआरईओ समूह से लगभग 400 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे, जिसे आईआरईओ के दस्तावेजों में डेवलपमेंट राइट्स के भुगतान के रूप में दिखाया गया था। शुरुआत में एम3एम ग्रुप ने 10 करोड़ के भुगतान पर पांच शेल कंपनियों को जमीन के विकास अधिकार बेचे। उसकी तरफ से यह दावा किया गया कि ये पांच कंपनियां असंबद्ध संस्थाएं हैं लेकिन जांच से पता चला कि ये कंपनियां असल में एम3एम समूह द्वारा संचालित थीं।
आईआरईओ समूह को बेच दिए थे अधिकार
ईडी के अनुसार, बाद में इन कंपनियों ने उसी भूमि के विकास अधिकार लगभग 400 करोड़ रुपये में आईआरईओ समूह को बेच दिए। इसके बाद उस राशि को एम3एम ग्रुप को ट्रांसफर कर दिया गया। सभी शेल कंपनियों का स्वामित्व और संचालन एम3एम ग्रुप द्वारा इसके प्रमोटर्स बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल और उनके परिवार के सदस्यों के निर्देशन में किया गया था। इस तरह आईआरईओ और एम3एम ने 400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जो निवेशकों और ग्राहकों के थे।