चंडीगढ़। चंडीगढ़ नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) रजिस्ट्री की दूसरी रिपोर्ट ने चिंता में डाल दिया है। पीजीआई विश्व एनसीडी फेडरेशन और चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से शनिवार को जारी इस रिपोर्ट में सामने आया है कि चंडीगढ़ समेत पूरे उत्तर भारत में पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। जुलाई 2018 से दिसंबर 2021 तक के आंकड़ों पर आधारित इस रजिस्ट्री में 11.55 लाख से अधिक लोगों को शामिल किया गया है। इसमें 628822 पुरुष और 526822 महिलाएं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुल दर्ज मामलों में से 62.9% कैंसर के हैं, इसके बाद हृदयाघात (27.7%) और स्ट्रोक (8.3%) के मामले सामने आए हैं।
पीजीआई के एडवांस आई सेंटर सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व एनसीडी फेडरेशन के अध्यक्ष प्रो. जेएस ठाकुर ने की। उन्होंने बताया कि जुलाई 2018 से दिसंबर 2021 तक रजिस्ट्री में दर्ज कुल मामलों में से 62.9% मामले कैंसर, 27.7% हृदयाघात (हार्ट अटैक) और 8.3% स्ट्रोक के रहे। वहीं, युवा डायबिटीज़ (0.8%) और एप्लास्टिक एनीमिया (0.3%) के मामले भी सामने आए। जुलाई 2018 से दिसंबर 2021 तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार पुरुषों में सबसे अधिक मौतें फेफड़ों के कैंसर से हुईं, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी बनकर सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों में कैंसर मृत्यु दर में फेफड़ों का कैंसर (15.6%) सबसे ऊपर है। इसके बाद लीवर (6.8%), प्रोस्टेट (5.6%), इसोफेगस यानी भोजन नली (5.6%), लैरिंक्स (4.5%), पेट (4.5%), मुंह (4.4%), जीभ (3.7%), गॉलब्लैडर (3.6%) और यूरिनरी ब्लैडर (3.6%) प्रमुख रहे। विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान, प्रदूषण, शराब सेवन और अनियमित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। वहीं, महिलाओं में मृत्य दर में ब्रेस्ट कैंसर (20.7%) सबसे ज्यादा पाया गया। इसके बाद गॉलब्लैडर (9.2%), ओवरी (6.4%), सर्विक्स (4.9%), लिवर (4.5%), लंग्स (4.3%), यूटेरस (3.8%), ब्लड कैंसर यानी हेमेटोलॉजिकल (3.8%), पैंक्रियाज (3.2%) और इसोफेगस (3.2%) के मामले प्रमुख रूप से सामने आए।
रजिस्ट्री के अनुसार महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद गॉलब्लैडर और ओवरी कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं, जो क्षेत्रीय खानपान आदतों और पर्यावरणीय कारणों से जुड़े हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कैंसर की पहचान देरी से होने के कारण मृत्यु दर अधिक है। पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा है कि कैंसर के खतरे को कम करने के लिए समय पर निदान और जनजागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। उन्होंने नियमित स्क्रीनिंग, संतुलित आहार, धूम्रपान से परहेज और प्रदूषण नियंत्रण जैसी पहलों को तत्काल अपनाने की सलाह दी है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में डॉ. मनीष बंसल (डीजीएचएस, हरियाणा), प्रो. जीपी थामी (डायरेक्टर-प्रिंसिपल, जीएमसीएच-32) और डॉ. विपिन कौशल (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, पीजीआईएमईआर) शामिल रहे। इस अवसर पर रिपोर्ट और फैक्टशीट का विमोचन किया गया। इस दौरान ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस माह के तहत आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता ने समारोह में उत्साह भर दिया। इसमें डीसीएम एंड एसपीएच के छात्रों और नर्सिंग कॉलेज (नाइन, पीजीआई) की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इनसेट -
मुख्य आंकड़े (2018–2021):
कुल कैंसर मामले: 4166 (62.9%)
हार्ट अटैक: 1835 (27.7%)
स्ट्रोक: 547 (8.3%)
पुरुषों में प्रमुख कैंसर: फेफड़ा (14.7%), प्रोस्टेट (13.9%)
महिलाओं में प्रमुख कैंसर: ब्रेस्ट (36.3%), ओवरी (7.4%)
पहली रजिस्ट्री में ये थी स्थिति (2018 से 2019 तक)
उस समय पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर सबसे आगे
रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में ट्रेकिया, ब्रॉन्कस और फेफड़ों का कैंसर सबसे ज्यादा पाया गया था। यह कुल मामलों का 12 प्रतिशत है। इसके बाद प्रोस्टेट (8.1%), मुंह का कैंसर (6.3%), मूत्राशय (5.1%), लिवर (5%), और जीभ (4.8%) प्रमुख रहे थे। गले (लैरिंक्स), इसोफेगस, और नॉन-हॉजकिन लिंफोमा जैसे कैंसर भी उल्लेखनीय अनुपात में दर्ज किए गए थे।
महिलाओं में उस समय भी ब्रेस्ट कैंसर था ज्यादा
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाधिक पाया गया था। यह कुल मामलों का 28.1% था। यानी हर चार में से एक महिला मरीज को यह रोग था। इसके बाद गॉल ब्लैडर कैंसर (8.3%), ओवरी कैंसर (7.1%), कॉर्पस यूटेरी (5.6%), और सर्विक्स यूटेरी (4.9%) प्रमुख रूप से पाए गए थे। इसके अतिरिक्त फेफड़ों (3.4%), लिवर (3.2%), और ब्रेन एवं नर्वस सिस्टम (2.9%) से जुड़े कैंसर के मामले भी दर्ज हुए।