ग्रामीण परिवेश से निकलकर एक सहज सा युवक शहरी परिवेश में पहुंचता है। अपनी क्रांतिकारी विचारधारा से जब वह समाज को बदलने की कोशिश करता है लेकिन उसके रास्ते में आता है उसका एकतरफा प्यार।
यह कहानी है लेखक उदय प्रकाश के लिखे नाटक राम सजीवन की प्रेम कथा का। इसका मंचन वीरवार को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में अलंकार थिएटर ग्रुप द्वारा किया गया। इसे लोगों ने काफी पसंद किया।
नाटक में दिखाया गया कि गांव का एक लड़का राम सजीवन नई दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने आता है। यहां वह देखता है कि शहरी लोग अपनी चीजों के लिए कितना खर्चा करते हैं।
उसका विचार है कि यह पैसा गरीबों की भूख मिटाने में काम आ सकता है। वह कविताएं लिखने लगता है। यहां उसकी मुलाकात होती है कैंब्रिज से पढ़कर लौटी लड़की अनीता चांदीवाला से।
वह सोचता है कि लड़की उसको प्यार करती है लेकिन ऐसा होता नहीं है। वह एक दिन लड़की को प्रेम पत्र देता है। लड़की इसकी शिकायत कालेज में कर देती है।
कालेज राम सजीवन को बाहर का रास्ता दिखा देता है। एक साल बाद वह कालेज में फिर से लौटता है तो जन आंदोलन से जुड़ जाता है। नाटक के अंत में दिखाया गया है कि राम सजीवन टूट जाता है।
कलाकार
ओमप्रकाश, सुमीत कालिया, राजेश कुमार कश्यप, शिवानी, मधुसूदन कौशल, नितिन शर्मा, प्रिया, जस्सी, प्रोमिला, अभिषेक, अदिति, खुशबू शर्मा, नितिन त्रिपाठी, मोहित, ज्योति, हिना, प्रशांत और लखविंदर, मंजू यादव और चक्रेश कुमार यादव
लाइटिंग और डिजाइनिंग- अलंकार थिएटर ग्रुप
डायरेक्शन- अलंकार थिएटर ग्रुप