चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में व्यावसायिक साइट आवंटित न होने से 12.25 करोड़ का नुकसान हो गया। यही नहीं, मरीजों को जीवनरक्षक व अन्य दवाएं भी महीनों तक उपलब्ध नहीं हुईं। यह खुलासा 2022-23 की केंद्रीय ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। अब ऑडिट टीम ने आपत्ति जताते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जवाब मांगा है। ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2022-23 से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह पाया गया कि 11 प्रतिष्ठान 2 से 71 महीने की अवधि के लिए खाली रहे। पाया गया कि विभाग पिछले अनुबंध की समाप्ति व समाप्ति के तुरंत बाद वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों/दुकानों को किराए पर देने के लिए पुन: निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। नतीजा यह हुआ कि दुकानें खाली पड़ी रहीं। दुकानों का आवंटन न होने से जहां विभाग को राजस्व की हानि हुई वहीं, मरीजों को भी उसके लाभ से वंचित रखा गया।
इसके अलावा यह भी देखा गया कि दवा समिति की जिम्मेदारी अस्पताल के विभिन्न विभागों से प्राप्त मांग और पिछले तीन वर्षों की पिछली खपत के आधार पर वैध दर अनुबंध में उपलब्ध दवाओं की जांच करना है, जिससे दवाओं की वार्षिक मात्रा तय की जा सके जो विशेष वित्तीय वर्ष में खरीदे जाने थे लेकिन ऑडिट टीम को अभिलेखों की जांच से पता चला कि उपरोक्त दवाएं 24 से 417 दिनों की देरी से उपलब्ध कराई गईं। इस संबंध में विभाग द्वारा दिए गए जवाब से टीम संतुष्ट नहीं हुई।
इनसेट-
कितनी दुकानें बंद रहीं, कितना नुकसान हुआ
-
दुकान नंबर कुल कितने महीने खाली रही किराया
2
71 महीने
4330929 रुपये
6
14 महीने
846986 रुपये
7
22 महीने
188210 रुपये
8
31 महीने
1567918 रुपये
अंडर रैंप दवा की दुकान
18 महीने
112339800 रुपये
कैंटीन ब्लॉक बी
2 महीने
354886 रुपये
वेंडिंग मशीन
27 महीने
2261142 रुपये
2 एचसी
33 महीने
54450 रुपये
5 एचसी
9 महीने
41931 रुपये
6 एचसी
61 महीने
406016 रुपये
7 एचसी
7 महीने
69881 रुपये
कुल नुकसान
12.25 करोड़ रुपये
इनसेट
सिफारिशों को भी किया नजरअंदाज
ऑडिट में यह बात भी सामने आई है कि साल 2022-23 में प्रबंधन की कमेटी ने अस्पताल में इन दवाओं को रखने की सिफारिश की थी। ऑडिट के दौरान इन बिन्दुओं पर हुई जांच।
दवाओं के प्रकार
-दवाओं की सिफारिश- उपलब्ध थीं- उपलब्ध नहीं- अनुपलब्धता का प्रतिशत
1- एसेंसियल- 272- 221- 51- 19
2- वाइटल- 81- 71- 10- 12
3- डिसाइरेबल- 7-5- 2- 29
इनसेट-
ये दवाएं उपलब्ध नहीं थीं
दवा
दवा का प्रकार
कितने दिन उपलब्ध नहीं रही
एडेसिव ड्रेसिंग
एसेंसियल
417
क्लोनाजेपाम
एसेंसियल
80
डाइगोक्सीन
एसेंसियल
लोराजेपाम
एसेंसियल
80
वेनकोमाइसिन
एसेंसियल
215
आर्टेसुनाटा
वाइटल
64
हेपेटाइटिस बी इम्युनॉलॉजीबिन
वाइटल
24
फेनोबारबिटोन
वाइटल
48
बॉक्स
16.85 लाख जमा कराए लेकिन फायर एनओसी नहीं मिली
संस्थान में साल 2019 में आग लग गई थी। इस दौरान आग पर काबू पाने में काफी समस्या आई थी। इसके बाद फायर ब्रिगेड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के लिए 11 मई 2021 को 16.85 लाख रुपये जमा कराए गए थे। एक बैठक कर प्रबंधन ने 10 जून 2021 को इसके लिए एक सलाहकार भी नियुक्त कर दिया। ऑडिट के दौरान पता चला कि 19 महीने निकल जाने के बाद भी सलाहकार ने कोई काम नहीं किया था। काम करने वाली कंपनी का भी कोई रिकॉर्ड ऑडिट टीम को नहीं मिला। इस कारण प्रबंधन को एनओसी जारी नहीं हो सकी।
कोट
ऑडिट के सवालों के जवाब कई बिन्दुओं पर दिए जा चुके हैं। इस समय उससे जुड़ी पूरी जानकारी नहीं दे पाऊंगा।
- प्रो. एके अत्रि, डायरेक्टर प्रिंसिपल, जीएमसीएच 32
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कोट
ऑडिट में इस तरह की आपत्तियां आना वाकई गंभीर बात है। प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। इसे ठीक करने के लिए कड़ाई से काम करने की जरूरत है। सिस्टम में सुधार जरूरी है।
-आरके गर्ग, अध्यक्ष सेकेंड इनिंग एसोसिएशन और आरटीआई कार्यकर्ता