लोकसभा चुनावों में इस बार चंडीगढ़ से खड़े होने वाले उम्मीदवारों के पैसे बच जाएंगे। चुनाव घोषित हुए एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन उम्मीदवार न घोषित होने से चुनाव प्रचार में तेजी नहीं आ पाई है।
अब होली के बाद ही चुनाव प्रचार तेजी पकड़ेगा। ऐसे में उम्मीदवारों के पास चुनाव प्रचार के लिए 20 से 25 दिन ही मिलेंगे। इतने कम दिनों में उम्मीदवारों को पूरे शहर में लगभग छह लाख मतदाताओं के संपर्क करने में उम्मीदवारों को दिक्कत आनी तय है।
इस बार चुनाव आयोग ने चंडीगढ़ के उम्मीदवारों को 54 लाख रुपये तक खर्च करने की मंजूरी दी है। लेकिन, प्रचार के लिए समय कम होने से उम्मीदवारों के लिए 54 लाख रुपये खर्च करना भी आसान नहीं होगा।
चंडीगढ़ में इससे पहले हुए लोकसभा चुनावों में उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए दो से ढाई महीने मिल जाते थे, क्योंकि चंडीगढ़ में चुनाव अंतिम चरण में होता था। इस बार चुनाव तीसरे चरण में हो रहे हैं और चंडीगढ़ के उम्मीदवार तय करने में भी देरी हो रही है।
यही वजह है कि उम्मीदवारों को इस बार पिछले चुनावों की तुलना में शहर में चुनाव प्रचार के लिए अलग रणनीति तैयार करनी होगी। इन 20 से 25 दिनों में जहां शहर के अलग अलग इलाकों में जनसभाएं होनी हैं, वहीं कई बड़े नेताओं की रैली भी होनी है।
मुख्य सेक्टरों पर रहेगा फोकस
राजनीतिक दलों के नेताओं का कहना है कि इस बार का चुनाव प्रचार पिछले लोकसभा चुनावों से अलग होगा। पिछले सालों में उम्मीदवारों के पास प्रचार के लिए पर्याप्त समय होता था, जिससे वह हर सेक्टर में जाकर मतदाताओं से मिलते थे।
इस बार समय कम होने से ऐसा संभव नहीं होगा। इसलिए चुनाव प्रचार का फोकस मुख्य सेक्टरों में रहेगा। तीन चार सेक्टरों के लिए जनसभाएं एक जगह आयोजित की जाएंगी।