पंजाब में हर बार की तरह इस बार भी बड़ी तादाद में निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। 1951 से अब तक पंजाब में हुए विभिन्न लोकसभा चुनाव में 1989 को छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। आतंकवाद के साये में 1989 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान जरूर तीन निर्दलीय प्रत्याशी जीत हासिल करने में कामयाब हुए थे, जबकि पहली बार मैदान में उतरे अकाली दल (मान) के छह प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई थी।
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इससे पहले या इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में इस संदर्भ में लुधियाना लोकसभा सीट हॉट दिखाई पड़ रही है। यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक सिमरजीत सिंह बैंस चुनावी समर में कूद चुकेहैं। उनका मुकाबला शिअद के मनप्रीत सिंह अयाली, कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू और आप के एचएस फुल्का सहित अन्य दलों के उम्मीदवारों व निर्दलीय प्रत्याशियों से है।
जहां शिअद, कांग्रेस, आप व अन्य प्रत्याशियों के पास अपना निजी और अपनी-अपनी पार्टियों का वोट बैंक है, वहीं बैंस पिछले विधानसभा चुनाव के अपने प्रदर्शन व निजी जनसंपर्क के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में लुधियाना से जीत किसे हासिल होगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन धुरंधरों की उपस्थिति से लुधियाना में मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। सभी निगाहें इस सीट पर टिकी हुई हैं।
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निर्दलीय प्रत्याशियों का लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन
1989 के आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों को अमृतसर, पटियाला और फिरोजपुर से जीत हासिल हुई थी। अमृतसर से निर्दलीय उम्मीदवार किरपाल सिंह ने 272427 वोट लेकर कांग्रेस के रघुनंदन लाल भाटिया को सवा लाख वोट के बड़े अंतर से हराया था।
पटियाला से आजाद उम्मीदवार अतिंदरपाल सिंह ने 294172 वोट लेकर कांग्रेस के विनोद कुमार को करीब 81 हजार वोट से पराजित किया था। वहीं, फिरोजपुर में निर्दलीय ध्यान सिंह मंड को जीत हासिल हुए थी। उन्हें 202132, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के जगमीत सिंह बराड़ को 169282 मत मिले थे।
1989 में तीनों सीटों पर मत प्रतिशत की बात करें तो निर्दलीय प्रत्याशियोें को अमृतसर में 47.03, पटियाला में 46.95 और फिरोजपुर में 30.80 फीसदी वोट हासिल हुए थे।
लुधियाना का चुनावी गणित
लुधियाना लोकसभा सीट पर 2009 के आम चुनाव और 2012 के विधानसभा चुनाव का आंकलन, यहां की सियासी तस्वीर को स्पष्ट करता है। 2009 के आम चुनाव में कांग्रेस के मनीष तिवारी को यहां से शिअद प्रत्याशी गुरचरण सिंह गालिब के मुकाबले 113706 मतों से बड़ी जीत हासिल हुई थी।
तिवारी को लोकसभा क्षेत्र के अधीन आती 9 में से 7 सीटों पर बढ़त मिली थी, जबकि दाखा और जगरांव में वह कुछ मतों से पिछड़े थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में स्थिति बदली और कांग्रेस 9 में से केवल 3 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। शिअद को चार सीटों गिल, दाखा, जगरांव और लुधियाना ईस्ट से विजय प्राप्त हुई।
इस बार लुधियाना लोकसभा सीट से शिअद प्रत्याशी मनप्रीत अयाली पिछले विधानसभा चुनाव में दाखा से 16388 मतों के अंतर से जीते थे। वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव का लुधियाना के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह रहा कि इस समय निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ रहे सिमरजीत सिंह बैंस और उनके कवरिंग उम्मीदवार व बड़े भाई बलविंदर सिंह बैंस भारी मतों के अंतर से निर्दलीय तौर पर विधायक बन गए थे।
दिलचस्प बात यह रही कि इन दोनों भाइयों के जीत के अंतर से भी कम वोट, उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को उस चुनाव में हासिल हुए। बलविंदर सिंह बैंस लुधियाना साउथ से 32233 मतों के अंतर से जीत, जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाले शिअद के हाकम सिंह गियासपुरा को 17361 मत हासिल हुए। वहीं, सिमरजीत सिंह बैंस 28503 वोटों के अंतर से जीते तथा इस सीट पर दूसरे स्थान पर आने वाले शिअद के हीरा सिंह गाबड़िया को 22560 मत हासिल हुए।
हर बार सीधी टक्कर देखता आ रहा लुधियाना लोकसभा क्षेत्र, इस बार शिअद, कांग्रेस, आप, निर्दलीय बैंस व अन्य उम्मीदवारों की वजह से बहुकोणीय मुकाबले का प्रतिबिंब बनकर उभरा है।
शिअद के मनप्रीत सिंह अयाली पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को चार सीटों पर मिली सफलता व अपनी समाज सेवा, कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू इस क्षेत्र में अपने परिवार व पार्टी के आधार, आप के एचएस फुल्का अपनी पार्टी को मिल रहे जनसमर्थन व सिखों के लिए खुद के द्वारा किए गए कार्यों और निर्दलीय सिमरजीत सिंह पिछले विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन व उसके बाद से जारी जनसंपर्क अभियान के आधार पर लोगों के बीच जा रहे हैं।
माकपा, बसपा सहित अन्य प्रत्याशी भी अपने-अपने स्तर पर चुनाव अभियान चलाए हुए हैं। अब देखना है कि लुधियाना के मतदाता 30 अप्रैल को परंपरा के अनुसार किसी पार्टी उम्मीदवार को ही विजय बनाते हैं या इतिहास बदलते हुए जीत किसी निर्दलीय की झोली में डालते हैं।