लोकसभा चुनाव 2019 में संगरूर से सांसद भगवंत मान के लिए दोबारा लोगों का भरोसा जीतना आसान नहीं है। बता दें कि यही से पंजाब में आम आदमी पार्टी की नींव रखी गई थी। लोकसभा सीट संगरूर में पहला चुनाव 1961 में हुआ था। उस समय कांग्रेस के रणजीत सिंह जीते थे।
1967 में अकाली दल संत ग्रुप की एन कौर, 1971 सीपीआई के तेजा सिंह, 1977 में शिअद के सुरजीत सिंह, 1980 में आईएनसी-आई के गुरचरण सिंह, 1985 में शिअद के बलवंत सिंह रामूवालिया, 1989 में एसएडी-एम के राजदेव सिंह, 1992 में कांग्रेस के गुरचरण सिंह, 1996 में शिअद के सुरजीत सिंह बरनाला, 1998 में शिअद के सुरजीत सिंह बरनाला, 1999 में एसएडी मान के सिमरनजीत सिंह मान, 2004 में शिअद के सुखदेव सिंह ढींढसा, 2009 में कांग्रेस के विजय इंदर सिंगला और साल 2014 में आम आदमी पार्टी से भगवंत मान विजेता रहे थे।
संगरूर सीट में इस बार आम आदमी पार्टी विशेष मायने रखती है। आम आदमी पार्टी की पंजाब में नींव यही रखी गई थी। भगवंत मान दोबारा यहां से चुनाव मैदान में है। साल 2014 के चुनाव के समय भगवंत मान संगरूर से 2.11 लाख वोट लेकर विजयी हुए थे। इसे पंजाब में एक रिकॉर्ड जीत माना गया था। इस बार आप का भविष्य भगवंत मान की जीत पर निर्भर रहेगा। इस बार मान की जीत इतनी आसान दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि उनके मुकाबले शिरोमणि अकाली दल ने पूर्व वित्तमंत्री रहे परमिंदर ढींढसा को चुनाव मैदान में उतारा है।
संगरूर लोकसभा सीट से उनके पिता सुखदेव ढींढसा सांसद भी रहे चुके हैं। पंजाब डैमोक्रेटिक अलांयस ने पूर्व आप नेता और गायक जस्सी जसराज पर दांव खेला है। कांग्रेस की बात करें तो केवल सिंह ढिल्लों को बतौर प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा गया है। शिअद मान दल के सिमरनजीत सिंह मान चुनाव मैदान में हैं।
कुल वोटर 1529432
पुरुष 814856
महिला 714551
अन्य 25
पोलिंग स्टेशन 1627
2014 के चुनाव गणित
कुल मतदाता- 1418457
मतदान- 1099505
प्रतिशत- 77.51
9 विधानसभा हलके शामिल
-लहरा
-सुनाम
-भदौड़
-बरनाला
-महलकलां
-मालेरकोटला
-धूरी
-संगरूर
-दिड़बा
भगवंत मान (आप)
मजबूती: 2014 में सबसे ज्यादा वोट से सांसद बने। एमपी लैंड फंड का आम जनता के लिए सही इस्तेमाल किया। आम लोगों के बीच इनकी छवि सकारात्मक है।
कमजोरी: पार्टी को कमजोर करने का मान पर आरोप है। ज्यादातर दिग्गजों ने उनका साथ छोड़ दिया है। हलके में कोई बड़ा प्रोजेक्ट लाने में नाकामयाब रहे। कई बार विवादों में रहे।
परमिंदर ढींढसा (शिअद)
मजबूती: अकाली-भाजपा सरकार में दस साल तक वित्त मंत्री रहे और संगरूर हलके में कई विकास कार्य करवाए। हलके के लोगों के प्रति इनका रवैया काफी नर्म है।
कमजोरी: पिता सुखदेव ढींढसा का चुनाव में इन्हें पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। बेअदबी की घटनाओं को लेकर जनता के गुस्से का सामना भी इन्हें करना पड़ रहा है।
केवल सिंह ढिल्लों (कांग्रेस)
मजबूती: विधानसभा हलका बरनाला से विधायक हैं। उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह का सबसे करीबी माना जाता है। ढिल्लों को एक सफल कारोबारी के तौर भी जाना जाता है।
कमजोरी: विधायक होने के बावजूद से जनता से दूरी बनाए रखना इनकी कमजोरी है। हलके के विकास के लिए इन्होंने अब तक कोई बड़ा काम नहीं किया है।
सिमरजीत सिंह मान (शिअद-अ)
मजबूती: शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के प्रधान हैं। संगरूर लोकसभा सीट से एक बार सांसद भी रहे चुके हैं। सांसद रहते हुए इन्होंने हलके के विकास के लिए ग्रांट का इस्तेमाल किया।
कमजोरी: धार्मिक कट्टरपंथी होना इनकी सबसे बड़ी कमजोरी है।