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लोकसभा चुनाव 2019: खडूर साहिब संसदीय सीट पर अकालियों में ही खिंचीं तलवारें

Fri, 17 May 2019 05:00 AM IST
Vikas Kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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shiromani akali dal - फोटो : फाइल फोटो
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माझा, मालवा और दोआबा को आपस में जोड़ने वाले लोकसभा क्षेत्र खडूर साहिब में इस बार मुख्य रूप से अकालियों के बीच ही तलवारें खिंचीं हुई हैं। परिसीमन के बाद 2008 में अस्तित्व में आए इस लोकसभा क्षेत्र में अब तक दोनों बार यह सीट अकाली दल की झोली में गई। मौजूदा सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा अकाली दल छोड़कर शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) पार्टी बना चुके हैं।   

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शिअद बादल ने बीबी जागीर कौर को यहां से टिकट दिया है, जिन्हें स्थानीय अकाली समर्थक बाहरी प्रत्याशी के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस ने जसबीर सिंह डिंपा को उतारा है जबकि आम आदमी पार्टी ने सीनियर कांग्रेसी नेता शमशेर सिंह दूलो की पत्नी हरबंस कौर दूलो को टिकट दिया है। 

यह लोकसभा सीट तो अकालियों के पास रही लेकिन इसके अंतर्गत आने वाले नौ विधानसभा क्षेत्रों में से तरनतारन, खडूर साहिब, पट्टी, खेमकरण, बाबा बकाला, जंडियाला गुरु, सुल्तानपुर लोधी, कपूरथला और जीरा में कांग्रेस के विधायक हैं। शिअद टकसाली ने पहले जनरल जेजे सिंह को मैदान में उतारा था लेकिन बाद में फैसला बदलते हुए पीडीए प्रत्याशी परमजीत कौर खालड़ा को समर्थन दे दिया है। ब्रह्मपुरा और पीडीए के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने अकाली दल के खिलाफ वोटों के विभाजन को रोकने की नीति अपनाई है। खडूर साहिब सीट पर मुख्य चुनौती शिअद बादल को ही मिलने वाली है। सभी दलों ने चुनाव प्रचार में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को मुख्य मुद्दा बनाया है। अकाली दल बादल इस मामले में बचाव की मुद्रा में है और कांग्रेस को विकास के मुद्दे पर निशाने पर ले रहा है, वहीं टकसाली व पीडीए प्रत्याशी और कांग्रेस की ओर से अकाली दल को बेअदबी के मुद्दे पर घेरने के लिए हर कदम उठाया जा रहा है। 
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कांग्रेस के जसबीर डिंपा विकास के मुद्दे पर जहां केंद्र की मोदी सरकार पर हमला करते दिखाई देते हैं वहीं परमजीत खालड़ा को पंथक चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। वे चुनाव में उतरने के अपने फैसले को, वाहेगुरु से मिला आदेश बता रही हैं। खालड़ा के पति व मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की 1995 में पुलिसकर्मियों ने उनके घर से ने अगवा कर हत्या कर दी थी। उनकी हत्या के दोषी छह पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। आप की ओर से हरबंस कौर दूलो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर ही निशाना साध रही हैं। 

2014 में अकाली ने जीती थी यह सीट
परिसीमन के बाद 2009 में अस्तित्व में आई इस लोकसभा सीट पर पहले चुनाव में अकाली दल के रतन सिंह अजनाला विजयी रहे थे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी शिरोमणि अकाली दल (बादल) के उम्मीदवार रणजीत सिंह ने कांग्रेसी उम्मीदवार हरमिंदर सिंह गिल को 1,00,569 वोटों से हराया था। अकाली-भाजपा गठबंधन प्रत्याशी को 44.9 फीसदी वोट शेयर के साथ 4,67,332 वोट मिले थे जबकि कांग्रेसी उम्मीदवार को 35.2 फीसदी शेयर के साथ कुल 3,66,763 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर रहे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार बलदीप सिंह को 13.9 फीसदी वोट के साथ कुल 1,44,521 वोट हासिल हुए थे।

सांसद का दावा 
मौजूदा सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने अपने कार्यकाल के दौरान लोकसभा में कुल 30 सवाल पूछे और छह बहस में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सांसद निधि कोष से 90 फीसदी रकम का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए किया।

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