हरियाणा में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के शानदार प्रदर्शन का असर यह रहा कि कई सीनियर विधायक अपने दल के प्रत्याशी को जितवाना तो दूर अपने गढ़ में भी बढ़त भी नहीं दिलवा पाए। इन सीनियर विधायकों को वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में जितने वोट मिले थे, उतने वोट वे अपने लोकसभा प्रत्याशी को अपने इलाकों में नहीं दिलवा पाए। उनके लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि चार महीने बार विधानसभा की बिसात तैयार है।
इनेलो के दिग्गज विधायक व पूर्व नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला को वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में सिरसा के ऐलनाबाद हलके से 69162 वोट मिले थे। लेकिन मई 2019 के लोकसभा चुनाव में अभय चौटाला सिरसा सीट से अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी चरणजीत सिंह रोड़ी को अपने हलके से सिर्फ 18749 मत ही दिलवा पाए। उधर, सीनियर विधायक एवं जननायक जनता पार्टी (जजपा) नेता नैना सिंह चौटाला भी अपने हलके डबवाली से अपनी पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी निर्मल सिंह मल्हाड़ी को बढ़त नहीं दिलवा पाई।
पिछले विधानसभा चुनाव में नैना सिंह चौटाला को डबवाली हलके से 68029 वोट मिले थे, लेकिन उन्हीं के हलके से जजपा के लोकसभा प्रत्याशी मल्हाड़ी को इस बार सिर्फ17016 वोट ही प्राप्त हुए। गुरुग्राम की नूंह सीट से इनेलो नेता जाकिर हुसैन तीन बार विधायक रह चुके हैं। पिछली बार 64221 वोट हासिल कर हुसैन फिर विधायक बने थे। लेकिन इस बार हैरत की बात यह कि गुरुग्राम संसदीय सीट पर इनेलो के लोकसभा प्रत्याशी वीरेंद्र राणा को कुल वोट ही सिर्फ 9911 ही मिले।
इसी तरह सोनीपत के जुलाना हलके से दो बार के इनेलो विधायक परमिंद्र सिंह ढुल पिछली बार 54632 वोट लेकर जीते थे, लेकिन सोनीपत संसदीय सीट से इनेलो के लोकसभा प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार छिक्कार को पूरे क्षेत्र से कुल मिलाकर सिर्फ 9149 वोट ही मिले।