हरियाणा में विरोधी भाजपा को घेरने के लिए तिकड़मबाजी में लगे हुए हैं। जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच गठबंधन की अटकलें तेज हैं। इस गठबंधन के प्रयास तो किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक आप का ‘मिजाज’ जजपा को रास नहीं आया है। जिस वजह से गठबंधन के ये प्रयास सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। जजपा आम आदमी पार्टी से गठबंधन तो चाहती है, लेकिन अपनी शर्त पर। उधर, आप इस गठबंधन में एक तीसरा सियासी दल भी शामिल करना चाहती है, जो जजपा को मंजूर नहीं है।
हरियाणा में जजपा का उदय इनेलो से विघटन के बाद विगत चार माह पूर्व ही हुआ है। जजपा ने प्रदेश में अपना वजूद साबित करने के लिए जनवरी 2019 में हरियाणा के जींद विधानसभा का उपचुनाव भी लड़ा था और कांग्रेस व इनेलो को पछाड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया था। भाजपा यह उपचुनाव जीती थी। इस उपचुनाव में जजपा को आम आदमी पार्टी ने पूरा समर्थन दिया था और इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। उपचुनाव के बाद दोनों पार्टियों ने प्रदेश में मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया था।
लेकिन सीटों के बंटवारे की वजह से दोनों पार्टियों के नेताओं में थोड़ी खटास आ गई। इसके बावजूद जजपा और आप का शीर्ष नेतृत्व लोकसभा चुनाव में मिलकर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। लिहाजा दोनों दलों के बीच की खटास को खत्म कर फिर से गठबंधन के प्रयास चल रहे हैं। मगर पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन प्रयासों को सिरे चढ़ाने में आप का ‘मिजाज’ बाधा बना हुआ है। दरअसल, आम आदमी पार्टी जजपा के साथ-साथ कांग्रेस को भी इस गठबंधन में शामिल करना चाहती है। इसके लिए आप का शीर्ष नेतृत्व प्रयास भी कर रहा है।
पिछले दिनों हरियाणा की कुल 10 सीटों में से 4 सीट पर कांग्रेस, 4 सीट पर जजपा और 2 सीट पर आप प्रत्याशियों को उतारते हुए भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव आप की ओर से दिया गया था। लेकिन हरियाणा कांग्रेस इस समझौते को तैयार नहीं है। उधर, प्रदेश में जजपा नेता भी आप के साथ तो जाने का तैयार हैं, लेकिन वे कांग्रेस को इस गठबंधन का हिस्सा नहीं बनाना चाहते। इसी को लेकर दोनों दलों में गठबंधन का पेच फंसा हुआ है।
उधर, इनेलो नेता दुष्यंत चौटाला कह चुके हैं कि अपनी विचारधारा वाली पार्टी से गठबंधन के लिए तीन सदस्यीय टीम मंथन कर रही है और वे ही फैसला लेंगे। फिलहाल इस गठबंधन के लिए जजपा ने अंतिम निर्णय आप पर ही छोड़ दिया है।