भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) ने लोकसभा चुनाव का बायकॉट नहीं किया है। लेकिन उनकी मुहिम अघोषित बायकॉट को लेकर ही चल रही है। यूनियन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि किसानों को कहा जा रहा है कि उन्हें सही लोकतंत्र लाने के लिए लामबंद होना पड़ेगा, संघर्ष करना होगा। क्योंकि मौजूदा पार्टियां सरमाएदारों की हैं।
ये कॉरपोरेट घरानों के लाखों करोड़ माफ कर सकती हैं, लेकिन गरीब किसानों का मामूली कर्ज नहीं माफ कर सकती। इनके एजेंडे में किसान, कर्ज, आत्महत्याएं, बेरोजगारी के बजाय पुलवामा, सर्जिकल स्ट्राइक, हिंदू-मुस्लिम है। हम किसी को वोट डालने से मना नहीं कर रहे, अगर किसी को कोई पार्टी या कैंडिडेट ठीक लगता है तो डाले। लेकिन हमारा यही प्रयास होगा कि किसानों को एकजुट किया जाए।
मैनिफेस्टो बने लीगल डॉक्यूमेंट
भारतीय किसान यूनियन (कादियां) चुनाव को लेकर आठ मई को फैसला करेगी। फिलहाल संगठन ने चुनावी मेनिफेस्टो को लीगल डॉक्यूमेंट बनाने को लेकर मुहिम छेड़ रखी है। मार्च में संगठन का दल इसे लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग से मिला भी था। अब हर गांव में दो-दो पोस्टर लगाए जा रहे हैं।
संगठन के प्रधान हरमीत कादियां ने बताया कि लोगों से कहा जा रहा है कि जो भी वोट मांगने आए उसे कहें कि मैनिफेस्टो को लीगल डॉक्यूमेंट बनाने को लेकर स्थिति स्पष्ट करें। पार्टियों से कहें कि लिख कर दें कि ऐसा करेंगी। क्योंकि जब तक ऐसा नहीं होगा किसानों का भला नहीं हो सका। भाजपा स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने से साफ मुकर गई। कांग्रेस ने भी वादे के मुताबिक कर्ज माफी नहीं की।
उम्मीदवारों को घेर रहे हैं लोग
गांवों में प्रचार के लिए जा रहे विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवारों को लोगों ने घेरना शुरू कर दिया है। लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी के प्रधान बलदेव सिरसा ने कहा कि भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू नहीं कर सकते। कांग्रेस का भी यही हाल है। लोगों से कहा जा रहा है कि इन्हें छोड़ कर जो भी ठीक लगे, उसे वोट दे दो।