लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव 2019 में आम आदमी पार्टी का हश्र हरियाणा में पंजाब जैसा न हो, इसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पूरी तरह से गंभीर हैं। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी चुनावों से पहले न केवल हरियाणा में हर कदम फूंक-फूंक कर रखेगी, बल्कि पंजाब की गलतियों से सीखकर ही पार्टी सूबे में अपनी ताल ठोकेगी।
सूबे में चुनावी पारी से पहले पार्टी को कैसे मजबूती देनी है, आम लोगों तक अपनी पार्टी की नीतियां और ‘दिल्ली मॉडल’ कैसे पहुंचना है और कैसे दिल्ली की तरह सूबे की जनता को पार्टी से जोड़ना है। इसके लिए खुद अरविंद केजरीवाल रोडमैप तैयार करेंगे। केजरीवाल हरियाणा के आप नेताओं को ‘मिशन हरियाणा’ के विजन को स्पष्ट करेंगे। इस बाबत अरविंद केजरीवाल हरियाणा के नेताओं की कुछ बैठकें ले भी चुके है। इन बैठकों में हरियाणा में संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ आगामी चुनावों में बेहतरीन परफार्मेंस पर चर्चा की गई।
दरअसल, वर्ष 2014 के आम चुनाव आप ने हरियाणा और पंजाब दोनों सूबों में लड़ा था। हरियाणा में तो आपका सूपड़ा साफ हो गया था, लेकिन पंजाब में आप 4 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही। इसी प्रदेश में पूरी पार्टी का लोस चुनाव में जीत का खाता भी खुला था। इसी से उत्साहित आप ने फरवरी 2017 में पंजाब में विधानसभा चुनाव भी लड़ा।
चुनाव से पहले तक तो पंजाब में आप की मजबूत स्थिति खासी दिख रही थी, लेकिन कुछ गंभीर गलतियों के चलते विरोधियों ने पंजाब में आप की घेराबंदी कर ली और आप मजबूती के पायदान से फिसलती हुई सिर्फ 20 सीटें ही जीत पाई। उसके बावजूद पार्टी पंजाब में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी। लेकिन वर्तमान में पंजाब 'आप' में जबरदस्त घमासान चल रहा है और पार्टी टूट की कगार पर है। अब यही कहानी आप हरियाणा में नहीं दोहराना चाहती।
इंसान हो या दल उसे अपनी हर गलतियों से सीखने की जरूरत है। हम हरियाणा में मजबूती से आना चाहते हैं, इसलिए हमसे पंजाब में जो गलतियां हुई, उससे सीखेंगे और हरियाणा में उसे नहीं दोहराएंगे।
- अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय संयोजक आप एवं मुख्यमंत्री दिल्ली