पटियाला लोकसभा सीट पर 16 में से 10 बार कांग्रेस जीती। यह कैप्टन का गृह जिला है। परनीत यहां से लगातार तीन बार सांसद रहीं हैं। 1999 में उन्हें 46.06 फीसदी, 2004 में 46.89 फीसदी और 2009 में 50.66 फीसदी वोट मिले थे। हालांकि 2014 में कांटे की लड़ाई में वे 21 हजार वोटों से हार गई थीं।
कांग्रेस ने विधानसभा में दिखाई थी ताकत
पिछले चुनाव में पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से 6 भाजपा-शिअद गठबंधन ने जीती थी। कांग्रेस को 3 और पहली बार चुनाव लड़ने वाली आप को 4 सीटें मिली थीं। लेकिन, 10 साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस ने 117 में से 77 सीटें जीतकर अपनी ताकत का अहसास कराया था। भाजपा-अकाली गठबंधन 18 सीटों पर सिमट गया था।
अपनों की नाराजगी भी सिरदर्द बनी
कांग्रेस में मान-सम्मान न मिलने और नजरअंदाज किए जाने पर नाभा में चार हजार से ज्यादा टकसाली कांग्रेसी परिवारों ने नवां पंजाब पार्टी का दामन थाम लिया है। अमलोह से कांग्रेसी विधायक काका रणदीप सिंह ने टिकट न मिलने पर परनीत के लिए प्रचार करने से इनकार कर दिया। रणदीप नाभा के राजसी परिवार से हैं और नाभा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं। वहीं, रखड़ा को भाजपा के नेताओं को साथ लेकर चलना मुश्किल हो रहा है।
तभेदों के चलते अब तक भाजपा के अधिकतर स्थानीय नेताओं ने रखड़ा के चुनाव प्रचार से दूरी बना रखी है। उसपर बादल सरकार के राज में बेअदबी की घटनाओं ने भी रखड़ा की पटियाला में साख को काफी नुकसान पहुंचाया है। डॉ. धर्मवीर गांधी का इस बार चुनाव निशान बदलकर माइक हो गया है। वालंटियर की कमी के चलते वे इसे ग्रामीण इलाकों तक प्रचारित नहीं कर पा रहे हैं। जबकि, आम आदमी पार्टी की नीना मित्तल को गुटबाजी का नुकसान हो सकता है।