वहीं, दूसरी ओर जीएमसीएच-32 के एनिस्थिसिया विभाग का एक कोरोना संदिग्ध डॉक्टर सोमवार को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (लामा) हो गया। वह अस्पताल में खुद के संक्रमित होने के डर से बिना डॉक्टरों की अनुमति के घर चला गया। सूत्रों के अनुसार, उस डॉक्टर को एक अन्य कोरोना के संदिग्ध मरीज के साथ अस्पताल के प्राइवेट रूम में रखा गया था। उन दोनों की रिपोर्ट पेंडिंग है। ऐसे में उस डॉक्टर का कहना है कि अगर वो कोरोना संक्रमित न भी हुआ तो दूसरे संदिग्ध के साथ एक ही रूम में रहने में कारण पॉजिटिव हो जाएगा। उसने इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन से की थी लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
पांच लोगों की रिपोर्ट मिली नेगेटिव
सोमवार को पांच लोगों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई। इनमें हल्लोमाजरा निवासी कोरोना पॉजिटिव मृतक के संपर्क में आए 32 साल का युवक, सुखना लेक स्थित टॉयलेट में काम करने वाले 39 साल के सफाई कर्मचारी, सेक्टर-27 में काम करने वाले बापूधाम निवासी 32 वर्षीय ड्राइवर, सेक्टर-27 में जिस घर में काम वाली महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी, उस घर में रहने वाली 81 साल की बुजुर्ग महिला और मलोया निवासी 55 साल की महिला की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल में कोरोना को मात देकर चंडीगढ़ के चार मरीजों ने सोमवार को घर वापसी की। कोरोना संक्रमण के बाद ठीक होने वाले मरीजों में सेक्टर-26 बापूधाम निवासी एक पुरुष, बापूधाम निवासी एक महिला, सेक्टर 49 डी और सेक्टर 21 निवासी दो डॉक्टर शामिल हैं। ये सभी 27 अप्रैल को कोरोना संक्रमित होने के बाद पीजीआई में भर्ती किए गए थे।
पीजीआई से छुट्टी मिलने पर इन सभी मरीजों ने डायरेक्टर और डॉक्टरों का आभार जताया। मरीजों ने कहा कि पीजीआई की बदौलत उन्हें नया जीवन मिला है। बापूधाम के दो मरीजों में से एक वहां के सबसे पहले संक्रमित हुए मरीज की मां और एक उसका पड़ोसी है। वहीं, जीएमसीएच 32 के दोनों डॉक्टर अस्पताल में तैनात बापूधाम के ही पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने के बाद संक्रमित हुए थे। इन चार मरीजों के साथ अब तक शहर के 28 कोरोना पॉजिटिव मरीजों ने कोरोना को मात दी है।