देश में अहम मानी जाने वाली चंडीगढ़ की सेनेटरी इंडस्ट्री भी प्रशासन की बेरुखी से अब मोहाली और डेराबस्सी की तैयारी कर रही है। 12 फीसदी उद्यमी ऐसे हैं जो कि मोहाली और डेराबस्सी में शिफ्ट हो चुके हैं और कई मोहाली और डेराबस्सी में प्लॉट लेकर पलायन की तैयारी में है। उद्यमियों का कहना है कि जीएसटी आने के बाद चंडीगढ़ की प्रोडक्शन कास्ट जगह की कीमत की वजह से ज्यादा हो जाएगी। इससे बेहतर है कि चंडीगढ़ छोड़ दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया जाए। चंडीगढ़ में 100 सेनेटरी इंडस्ट्री हैं। इनकी संख्या पहले डेढ़ सौ तक थी। यहां हर प्रकार के सेनेटरी प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं।
सेनेटरी का काम करने वाले एचएस खन्ना ने कहा कि सेनेटरी प्रोडक्ट सबसे महंगा होता है। इसमें वाल मिक्सचर, बेसिन मिक्सचर, टावेल हैंगर के साथ ही फ्रेश रूम के लिए प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में अब सब कुछ महंगा हो चुका है। मसलन, बिजली महंगी है, टैक्स भी ज्यादा है। मोहाली में ऐसा नहीं रह गया है। चंडीगढ़ में प्रापर्टी भी ज्यादा महंगी हो चुकी है। ऐसी स्थिति में उद्यमी चंडीगढ़ के बजाय मोहाली और डेराबस्सी में काम करना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन जमीन को लीज होल्ड से फ्री होल्ड नहीं कर रहा है। जिसकी वजह से उद्यमियों को लोन की समस्या आ रही है।
हमको काम के लिए लोन भी नहीं
चंडीगढ़ में सेनेटरी प्रोडक्ट तैयार करने वाले उद्यमी जगमीत सिंह ने कहा कि कच्चे माल की कीमत बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से काम बढ़ाने के लिए ज्यादा रुपये चाहिए। ऐसी स्थिति में लोन की दरकार होती है। लेकिन बैंक लोन नहीं देते क्योंकि हमारे प्लाट जीपीए पर हैं। हमारे पास इतना फंड नहीं कि कच्चा माल उठा सकें।
जीएसटी पर टिकी सेनेटरी इंडस्ट्री
चंडीगढ़ के उद्यमी कंवरदीप सिंह ने कहा कि जीएसटी के लागू होने के बाद चंडीगढ़ में इंडस्ट्री चलाने का कोई लाभ नहीं होगा। कई उद्यमियों ने अपने प्लाट पहले ही मोहाली में ले लिए हैं। जीएसटी के लागू होने के बाद सेनेटरी इंडस्ट्री के पूरी तरह से मोहाली और डेराबस्सी में जाने की संभावना है।