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Chandigarh News: 62 साल बाद लौटेगी कार्बुजिए की पहचान

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चंडीगढ़। विश्व धरोहर कैपिटल कॉम्प्लेक्स के पंजाब विधानसभा भवन का ऐतिहासिक हॉल अब 62 साल बाद अपने मूल स्वरूप में लौटेगा। चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने विधानसभा हॉल के रिस्टोरेशन, प्रिजर्वेशन और कंजर्वेशन के लिए 1.06 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है। इस परियोजना का उद्देश्य भवन की ऐतिहासिक और वास्तुशिल्पीय पहचान को बिना बदले सुरक्षित रखना है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद संरक्षण कार्य शुरू होगा।
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यह वही विधानसभा भवन है जिसे विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार ली कार्बुजिए ने डिजाइन किया था। यह भवन वर्ष 2016 से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कैपिटल कॉम्प्लेक्स का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों के दौरान भवन के भीतर कई बदलाव हुए और समय के असर से कंक्रीट क्षतिग्रस्त हुई, पानी का रिसाव बढ़ा और कई संरचनात्मक कमियां सामने आईं। अब इन्हें मूल तकनीक और मूल निर्माण सामग्री के अनुरूप ठीक किया जाएगा।
इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार संरक्षण कार्य के दौरान आधुनिक निर्माण तकनीकों का उपयोग नहीं किया जाएगा। पूरा काम हेरिटेज कंजर्वेशन के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगा, ताकि भवन की मूल डिजाइन, फिनिश और वास्तुशिल्पीय विशेषताएं अक्षुण्ण रहें।
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बाहरी हिस्सा पहले ही हो चुका संरक्षित
कैपिटल कॉम्प्लेक्स की तीनों प्रमुख इमारतों पंजाब एवं हरियाणा सचिवालय, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और पंजाब विधानसभा के बाहरी हिस्से का संरक्षण पहले ही किया जा चुका है। दीवारों की मरम्मत, काई हटाने, वाटरप्रूफिंग और बाहरी अतिक्रमण हटाने का कार्य पूरा हो चुका है। अब विधानसभा भवन के अंदरूनी हिस्से को मूल स्वरूप में बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

37.50 करोड़ से बढ़कर 58 करोड़ पहुंची परियोजना
शुरुआत में तीनों इमारतों के संरक्षण का अनुमानित खर्च 37.50 करोड़ रुपये था जिसे बाद में बढ़ाकर 58 करोड़ रुपये किया गया। इसमें फायर सेफ्टी, सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग और अन्य तकनीकी कार्य भी शामिल किए गए। सचिवालय भवन के संरक्षण का अनुमान 25.50 करोड़ से बढ़कर करीब 38 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

ऑडिट में उठे थे सवाल : इंजीनियरिंग विभाग ने आर्किटेक्ट कंसल्टेंट को 1.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया था लेकिन परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। वर्ष 2025 में इस पर ऑडिट आपत्ति भी दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार, कैपिटल कॉम्प्लेक्स के अंदरूनी हिस्सों से अतिक्रमण हटाने में समय लगने के कारण टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई।
पंजाब विधानसभा हॉल को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित करने के लिए टेंडर जारी किया गया है। अंदरूनी हिस्से से अतिक्रमण हटाने में समय लगा इसलिए काम शुरू होने में देरी हुई। अब प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। -सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, चंडीगढ़ प्रशासन
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