चंडीगढ़। स्विस वास्तुकार ली कार्बुजिए का डिजाइन किया फ्लोर लैंप अमेरिका के न्यूजर्सी में 23 लाख रुपये में बिका है। यह फ्लोर लैंप कुछ साल पहले चंडीगढ़ से गायब हुआ था। न्यूजर्सी के रागो नीलामी घर की तरफ से की गई नीलामी में शहर के नौ हेरिटेज आइटम्स की नीलामी की गई, जो करीब 1.17 करोड़ रुपये में बिके हैं। इसमें कुर्सी, मेज, स्टूल आदि शामिल रहे।ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे के काम को पसंद करने वालों की संख्या लाखों-करोड़ों में हैं। उनके चाह्वान कीमत की परवाह किए बिना उनके डिजाइन किए गए सामानों को लाखों-करोड़ों रुपये में खरीदते हैं। इन फर्नीचरों की मांग विदेशों में बहुत ज्यादा है। इसे देखते हुए न्यूजर्सी के नीलामी घर ने चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवन के कार्यालय की कुर्सियां, लाइट डेस्क व कुर्सी, डेबेड, फ्लोर लैंप, डेस्क व कार्यालय की कुर्सियां, कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर की कुर्सियां, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज की आर्मचेयर, एमएलए फ्लैट्स बिल्डिंग के लो स्टूल (चार का सेट) की नीलामी की गई। इस नीलामी को लेकर चंडीगढ़ हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने भारत के महावाणिज्यदूत शिकागो (यूएसए) सोमनाथ घोष को भी शिकायत भेजकर जांच की मांग की है।
स्थानीय स्तर पर ही अधिकारी गंभीर नहींः जग्गा
अजय जग्गा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2011 में ही आदेश जारी कर दिया था कि चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचरों को न तो बेचा जा सकता है, न रिप्लेस किया जा सकता है और न ही किसी अन्य जगह शिफ्ट किया जा सकता है। इसके बावजूद वर्षों तक इस आदेश की उल्लंघना होती रही। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में आज भी हजारों करोड़ के हेरिटेज आइटम बिखरे पड़े हैं, लेकिन दुख की बात है कि स्थानीय स्तर पर ही अधिकारी इनके संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। अभी भी चोरी की शिकायत मिलती रहती है। हालांकि विदेशों में जिन आइटम्स की नीलामी हो रही है, वे कई साल पहले विदेश गए थे जो अब नीलाम हो रहे हैं।
2014 में प्रशासन ने खुद बेच दिए थे कई फर्नीचर, अब विदेशों में हो रहे नीलाम
जग्गा ने बताया कि प्रशासन ने 2014 में खुद बड़ी मात्रा में हेरिटेज फर्नीचर को बेच दिया बजाय यह अंदाजा लगाए कि इसकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में वैल्यू बहुत ज्यादा है। जानकारी के अनुसार यह खरीदने वाले भी विदेशी ही थे, जिन्होंने पहले शहर का दौरा किया था और फिर उन्होंने प्रशासन के सामने प्रस्ताव रखकर फर्नीचर को खरीदकर ले गए थे। अब वही फर्नीचर अलग-अलग देशों में नीलाम हो रहे हैं। बता दें कि हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी यूरोपीय देशों में ज्यादा होती है। मुंबई में भी एक बार चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी हुई है। पिछले पांच साल में विभिन्न देशों के नीलामी घरों में बेचे गए हेरिटेज फर्नीचर, मेनहोल, जेनरे का लिखा लेटर और दूसरी आइटम से नीलाम घर 40 करोड़ से अधिक का कारोबार कर चुके हैं।
आज भी इन जगहों पर मौजूद है हेरिटेज फर्नीचर
ली कार्बूजिए और उनके चचेरे भाई पियरे जेनरे ने फर्नीचर ही नहीं, बल्कि मेनहोल कवर, फुट लैंप, कंक्रीट लाइट फिक्सचर (जो सुखना लेक पर लगे हैं) और कुछ लोहे के पल्ले भी डिजाइन किए थे। इन सभी को हेरिटेज माना जाता है। पियरे जेनरे ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, विधानसभा, सचिवालय, पंजाब विश्वविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान और दूसरी प्रशासनिक बिल्डिंग के लिए फर्नीचर डिजाइन किए थे। पंजाब यूनिवर्सिटी में यह फर्नीचर सबसे बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। अभी भी इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि प्रशासन के पास ऐसी कोई निश्चित संख्या नहीं है।