चंडीगढ़। जिला अदालत के वकीलों ने तीसरे दिन बुधवार को अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। अदालत में लगातार तीन दिन वर्क सस्पेंड से करीब 7.5 हजार से अधिक केस प्रभावित हुए हैं। इनमें रेंट एक्ट, झपटमारी, दुष्कर्म, मोटर एक्सीडेंट क्लेम, प्रॉपर्टी विवाद, वैवाहिक विवाद, जमानत याचिका, चेक बाउंस, आपराधिक मामलों समेत सिविल मामले शामिल हैं। रेंट एक्ट के तहत नई रेंट अथॉरिटी के गठन, रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल के विरोध में लगातार तीसरे दिन अधिकतर मामलों में न्यायालय ने तारीख देखकर अपनी कार्रवाई पूरी की। वकीलों के वर्क सस्पेंड से तीसरे दिन भी अदालती कामकाज के सिलसिले में पहुंचे लोगों के हाथ निराशा ही लगी।
बुधवार सुबह 11 बजे वकीलों ने जिला अदालत के मुख्य गेट से अपना प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद बार एसोसिएशन के सदस्य ज्यूडिशियल एकेडमी लाइट पॉइंट, सेक्टर-42 चौक, सेक्टर-52 चौक के पास से घूमकर फिर अदालत के गेट पर पहुंचे। इस दौरान बार के तीन से अधिक सदस्य मौजूद रहे। वकीलों ने टेनेंसी एक्ट के विरोध में नारेबाजी करते हुए एक्ट वापस लेने की मांग की। बार के सदस्यों ने बताया कि मांगों को लेकर गवर्नर, एडवाइजर, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सांसद मनीष तिवारी को रिप्रेजेंटेशन दिया जा चुका है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है इसलिए मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ रहा है। अब जल्द प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात करेंगे। बार एसोसिएशन के प्रधान रोहित खुल्लर ने कहा कि लोगों को वर्तमान समय में थोड़े दिन परेशानी हो रही है। अगर यह एक्ट कार्यान्वयन हो गया तो लोगों को बीस साल तक परेशानी होगी। यह एक्ट हम लोगों को कई साल पीछे ले जाएगा, जो रेंट के केस अभी दो साल में हल हो रहे हैं, उनको हल होने में बीस साल से भी अधिक का समय लगेगा।