चंडीगढ़। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली में आंदोलनरत युवाओं के समर्थन में चंडीगढ़ जिला अदालत के अधिवक्ता भी बुधवार को खुलकर सामने आ गए। अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण धरना शुरू कर आंदोलनकारियों पर पुलिस की कथित कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
अधिवक्ताओं ने कहा कि दिल्ली में युवा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और संबंधित संस्थानों की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग और कार्रवाई चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक युवाओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, उनका समर्थन और धरना जारी रहेगा।
धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने आंदोलन से जुड़े सभी मामलों में दर्ज एफआईआर तत्काल रद्द करने, गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा करने और पुलिस कार्रवाई में घायल लोगों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई। उन्होंने पुलिस कर्मियों और सिविल ड्रेस में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट करने वाले लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।
अधिवक्ताओं ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक विवाद का समाधान बल प्रयोग से नहीं बल्कि संवाद से निकलता है। उन्होंने प्रशासन से आंदोलनरत युवाओं के प्रतिनिधियों के साथ जल्द सार्थक बातचीत शुरू करने की अपील की, ताकि मामले का शांतिपूर्ण समाधान हो सके। धरने में मंजीत कौर संधू, सरबजीत कौर, आरती रामपाल, देविंदर सिंह, गुरदेव सिंह, विपिन कुमार और जीवाराज समेत कई अधिवक्ता शामिल रहे।