चंडीगढ़। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के वकीलों, मुंशियों और क्लर्कों ने वीरवार को जिला अदालत परिसर में कोर्ट न खुलने के विरोध में प्रदर्शन किया। वाइस प्रेसिडेंट करणदीप खुल्लर ने कहा कि वकील आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने फाइलिंग का काम तो खोल दिया है, लेकिन मुंशी और क्लाइंट को गेट के अंदर आने की अनुमति नहीं है। वे पूरा दिन गेट के बाहर खड़े रहते हैं। वकीलों को अगर क्लाइंट से कोई साइन कराना है तो उन्हें चेंबर से गेट तक खुद जाना पड़ता हैै। मुंशी के बिना ऑफिस मेंटेन नहीं हो पा रहा। क्लाइंट और वकील गेट पर खड़े होकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा के मामलों में कभी महिला की पहचान नहीं बताई जाती, लेकिन वर्तमान स्थिति में महिलाएं रोड पर खड़ी होकर मामलों की सुनवाई में शामिल हो रही हैं।
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुनील टोनी ने कहा कि कुछ वकील अपनी समस्याएं नहीं बता पा रहे हैं। मोहाली, पंचकूला और पंजाब के रोपड़ में अदालतें खुल रही हैं, लेकिन इस कोर्ट में लॉकडाउन के पहले दिन से ड्यूटी मजिस्ट्रेट तक नहीं बैठते। वकील गुरविंदर सैनी ने कहा कि कुछ महिला वकील अकेले अपने बच्चों को पाल रही हैं। जब अदालतें बंद रहेंगी तो वह अपने घर का खर्च कैसे चलाएंगी। वकीलों का कहना है कि चपरासी को अंदर आने की अनुमति है, लेकिन मुंशी को नहीं। मुंशी 4 महीने से खाली बैठे हैं। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट एडवोकेट रविंदर बस्सी ने कहा कि जब मंदिर, मसजिद और गुरुद्वारे खोल दिए गए हैं तो अदालत को क्यों नहीं खोला जा रहा। इस मौके पर बार एसोसिएशन के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट विनोद शर्मा, एडवोकेट भूपेंद्र राणा और एडवोकेट निधि शर्मा भी मौजूद रही।
मुंशियों को कोर्ट परिसर में आने की मिले इजाजत
प्रदर्शन के दौरान मुंशियों ने कहा कि अधिकतर मुंशी किराए के मकान में रहते हैं। कुछ मुंशी तो लगभग 25 साल से अदालत में काम कर रहे हैं। अदालत के अलावा आजीविका कमाने का कोई साधन नहीं है। यदि वकील उन्हें वेतन नहीं देंगे तो उनका घर-परिवार कैसे चलेगा। मुंशियों के बिना वकीलों का काम अधूरा है, इसलिए अदालत परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाए।