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पिछला साल बेमिसाल... 37 साल के बाद हुआ चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन का सपना साकार

Mon, 20 Jul 2020 02:27 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पिछला साल चंडीगढ़ के क्रिकेट इतिहास में सबसे खास रहा। 37 साल के लंबे इंतजार के बाद बीसीसीआई ने चंडीगढ़ की क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता दी। इससे सिटी के तमाम खिलाड़ियों के सपने साकार हुए। जो खिलाड़ी किसी अन्य प्रदेश से खेल रहे थे उन्हें चंडीगढ़ से खेलने का सुनहरा अवसर प्रदान हुआ।
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बीसीसीआई के फार्मेट के अनुसार चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन ने अपनी टीम बनाई है, इससे सैकड़ों खिलाड़ियों के करिअर को पंख लगे हैं। बेशक अभी कोरोना के चलते खेल गतिविधियां बंद हैं, लेकिन खिलाड़ियों का मनोबल कम नहीं हुआ है और वह घर पर ही प्रेक्टिस में जुटे हैं।

यूटी क्रिकेट एसोसिएशन 1982 में बनाई गई थी। 1983 के क्रिकेट विश्व विजेता के कप्तान और सिटी के स्टार क्रिकेटर कपिल देव भी इससे जुड़े रहे। शहर के क्रिकेटर बताते हैं कि पहले दूसरे राज्यों की टीमों पर निर्भर रहना पड़ता था। कभी टीम में जगह मिली तो कभी बाहर का रास्ता दिखाया गया। कभी वेटिंग लिस्ट में नाम अटका रहा, लेकिन अब खुद की एसोसिएशन बनने से सुनहरा अवसर मिला है।
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पहली बार बनी टीम ने प्रदर्शन से चौकाया
बीसीसीआई से मान्यता मिलने के बाद यूटीसीए ने बीसीसीआई फॉर्मेट के अनुसार अपनी टीमें बनाईं। इसमें लड़कियों की टीमें में अंडर-19, 23, सीनियर व लड़कों की टीम में अंडर- 16, 19, 23 और सीनियर की टीमें शामिल रहीं। इन सभी टीमों ने पिछले साल ही देश के अन्य राज्यों की टीमों के साथ खेलते हुए शानदार प्रदर्शन भी किया और कई रिकॉर्ड बनाकर अधिकारियों को चौकाया था।

रणजी टीम ने पहले ही मैच में परचम लहराया
बीसीसीआई से मान्यता मिलने के बाद रणजी ट्रॉफी के लिए चंडीगढ़ की टीम बनाई गई। टीम की कमान मनन वोहरा को सौंपी गई। चंडीगढ़ की टीम ने रणजी का सफर अपने घर से शुरू किया। चंडीगढ़ का पहला मुकाबला अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ सेक्टर-16 क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया। इसमें चंडीगढ़ की टीम विजेता बनी।

ये दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं सिटी ब्यूटीफुल ने

1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव, 2011 वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे युवराज सिंह चंडीगढ़ से ही हैं। इनके अलावा अशोक मल्होत्रा, योगराज सिंह, चेतन शर्मा, दिनेश मोंगिया, सिद्धार्थ कौल और वर्तमान में टीम के हेड कोच वीआरवी सिंह खुद भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं।

खेल को बढ़ावा देने के लिए चल रहीं अकादमियां
शहर में खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई अकादमियां चल रही हैं। खेल विभाग व साईं की ओर से 48 से ज्यादा कोच नियुक्त किए गए हैं। टेनिस के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का मैदान बना है। इसमें डेविस कप के मुकाबले भी खेले गए हैं। वहीं हॉकी के लिए भी अलग स्टेडियम बने हैं।

गोल्फ की नर्सरी भी चंडीगढ़ में
शहर में 11 होल का गोल्फ कोर्स है। वहीं युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण के लिए गोल्फ रेंज भी हैं। इसी गोल्फ कोर्स में खेलकर जीव मिल्खा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया। वहीं अर्जुन अवार्डी हरमीत, इरिना बराड़ के साथ आदिल बेदी, वसुंधरा, संदीप कोचर, जयदीप संधू भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

कोरोना वर्तमान समय में चुनौती है, लेकिन नामुमकिन कुछ नहीं है। खिलाड़ियों के लिए कई टूर्नामेंट ऐसे थे जो कोरोना के कारण रद्द करने पड़े। भविष्य को लेकर कुछ कोचिंग शुरू कर दी है। साल के अंत तक उम्मीद है कि खिलाड़ी मैदान पर वापस लौटेंगे।
- केके यादव, स्पोर्ट्स सेक्रेटरी, यूटी प्रशासन
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कोच और खिलाड़ियों से बातचीत

पूर्व भारतीय फुटबाल खिलाड़ी और सीनियर फुटबाल कोच हरजिंदर सिंह बताते हैं कि यह शहर बहुत बदल गया है। खेल में इंफ्रास्ट्रक्चर और खिलाड़ियों ने काफी तरक्की की है। आज से 20 साल पहले खिलाड़ियों को न तो पैसा मिलता था और न ही खेलने के पर्याप्त साधान हुआ करते थे। जिस तरह शहर में खेल के मैदान व सुविधाएं मिली हैं, वह बदलाव एक मिसाल है। पहले फुटबाल और अन्य खेलों को एक मैदान ही हुआ करता था। अब शहर में कई स्टेडियम बन चुके हैं। पहले खिलाड़ी केवल अपने शौक के लिए खेलने आते थे, लेकिन अब यह करिअर बन गया है।

उम्मीद है जल्द कोरोना का कहर कम होगा.. खिलाड़ी मैदान पर होंगे
यूटीसीए रणजी टीम के तेज गेंदबाज श्रेष्ठ निर्मोही का कहना है कि कोरोना ने खेल को पूरी तरह से प्रभावित किया है। खिलाड़ी घरों में बंद है। क्रिकेट का मजा तो दर्शकों से है। जब बात सोशल डिस्टेंसिंग की आएगी तो दर्शक नहीं होंगे। अब उम्मीद है कि जल्द कोरोना का कहर कम होगा। हम मैदान में वापसी करेंगे। वर्षों से जो दिलों में अपने प्रदेश के लिए खेलने की इच्छा थी, उसे पूरा करेंगे।

बचपन का शौक करिअर में बदल गया
राष्ट्रीय तैराक पुनीत राणा कहते हैं कि पहले स्विमिंग पूल को देखते तो सोचते थे कि यही हमारा करिअर है। बचपन से ही तैराकी का शौक था, लेकिन बड़ी प्रतियोगिता में जाने के लिए बेहतर स्विमिंग पूल व कोच की जरूरत होती है। चंडीगढ़ में आज बेहतर पूल के कोच मौजूद हैं। मेरा चंडीगढ़ बदल रहा है। बचपन का शौक करिअर में बदल गया, यह मेरे लिए सुखद अहसास है। कोरोना ने थोड़ा रोका है, लेकिन ज्यादा नहीं।
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