भाजपा हाईकमान की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। जाटों को पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण दिए जाने का पुरजोर विरोध करते रहे सैनी का साफ कहना है कि उनके लिए समुदाय सबसे पहले है, जबकि पार्टी बाद में।
हालांकि, उनका यह भी कहना है कि उन्हें अब तक कोई नोटिस नहीं मिला है। मंगलवार को सैनी ने एक टीवी साक्षात्कार में कहा कि वह किसी समाज विशेष को आरक्षण दिए जाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि आरक्षण के हकदार जाट ही नहीं पूरी 36 बिरादरी है।
उन्होंने कहा कि पार्टी का नोटिस मिलने के बाद ही वे तय करेंगे कि नोटिस का जवाब दें या नहीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया, जो उन्हें मुजरिम की तरह जवाब देना पड़े। उन्होंने कहा कि उनके बारे में पार्टी जो भी फैसला लेगी, उन्हें मंजूर होगा।
सैनी ने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर सभी जातियों को लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे हमेशा आरक्षण व्यवस्था का विरोध करते रहे हैं और उन्होंने जो मांग उठाई है, उस पर वे आज भी कायम हैं।
नहीं की ओछी बयानबाजी
सैनी ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने किसी जाति विशेष के खिलाफ कोई घटिया बयानबाजी की है। उन्होंने कहा कि अगर इस आरोप को कोई साबित कर दे, तो वे माफी मांग लेंगे, लेकिन किसी के दबाव में बिना वजह माफी नहीं मांगेंगे।
जाट आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने को लेकर उन पर लगे आरोपों को भी सिरे के खारिज करते हुए सैनी ने कहा कि हालात यह हो गए हैं कि जिनके हाथ में डंडा है, वह सरकार से अपनी बात मनवा रहे हैं और अन्य लोगों के हितों पर कुठाराघात कर रहे हैं।