- हाईकोर्ट में कहा-नए दस्तावेज के आधार पर सुरक्षा के लिए सरकार को देंगे मांग पत्र
-पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा की सुरक्षा वापस लेने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा में कटौती के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है। शर्मा ने कोर्ट में कहा कि वह नए सबूतों के साथ सरकार को सुरक्षा बहाल करने के लिए नया मांग पत्र देना चाहते हैं। इससे पहले शर्मा ने हाईकोर्ट में कहा था कि अगर हरियाणा सरकार उनको उचित सुरक्षा कवर प्रदान करती है तो वह राज्य की नीति के अनुसार शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार हैं। शर्मा ने यह भी दावा किया है कि सरकार ने उनके साथ पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों को प्रदान करने में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, क्योंकि अगर उन्हें ड्यूटी से छुट्टी लेनी पड़ती है तो राज्य द्वारा कोई प्रतिस्थापन प्रदान नहीं किया गया है। कुलदीप शर्मा ने यह जवाब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपनी सुरक्षा की मांग की एक याचिका के दौरान दिया। जिसमें उन्होंने अपने जीवन को खतरा बताते हुए सुरक्षा कवर की मांग की है। जब मामला जस्टिस विनोद एस भारद्वाज के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तो कुलदीप शर्मा के वकील ने तर्क दिया कि सरकार द्वारा दायर जवाब के अनुसार, उन्होंने गवाह संरक्षण योजना के तहत उनकी सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कर्मी की नियुक्ति का प्रावधान किया है। आरोप लगाया गया कि सरकार ने गवाह संरक्षण योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है । हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि राज्य के अधिकारियों ने सुरक्षा कर्मी के छुट्टी पर जाने या कुछ व्यक्तिगत कारणों से उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उक्त सुरक्षा कर्मियों के प्रतिस्थापन के संबंध में कोई व्यवस्था नहीं की है। जनवरी में हाईकोर्ट के समक्ष दायर अपनी याचिका में, कुलदीप शर्मा ने एडीजीपी सीआईडी द्वारा पारित 15 अक्टूबर, 2023 के आदेश को रद्द करने के लिए निर्देश मांगे हैं, जिसके तहत उसके जीवन को स्पष्ट खतरा होने के बावजूद बिना आकलन रिपोर्ट के आधार पर मनमाने ढंग से उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया गया था। याचिका में उसके जीवन को लगातार खतरे के मद्देनजर पिछले 30 वर्षों से राज्य सरकार द्वारा उन्हें प्रदान की गई सुरक्षा कवर को बहाल करने और जारी रखने के लिए आगे के निर्देश मांगे गए हैं। हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि करनाल के एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में उनकी जान को खतरा होने के संबंध में 5 दिसंबर, 2023 को एक एफआईआर भी दर्ज की गई थी।