पंजाब विधानसभा चुनाव कई मायनों में रोचक होता है। इस बार के चुनाव में मतदाताओं की संख्या के साथ ही सूबे में नेताओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। 10 वर्षों में राज्य में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 226 नेताओं की वृद्धि हुई है। 2012 में 1078 उम्मीदवारों ने विधानसभा के लिए चुनाव में भाग लिया। इस बार 1304 प्रत्याशी चुनाव मैदान में दिखाई देंगे। साथ ही राजनीतिक दलों की संख्या में भी 10 वर्षों में इजाफा हुआ है। इसके अलावा भी पंजाब की राजनीति से जुड़े कई अनोखे तथ्य हैं...
सबसे उम्रदराज नेता मैदान में
शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल देश के सबसे उम्रदराज उम्मीदवार हैं। 94 वर्ष के हो चुके बादल लंबी से मैदान में हैं। 1947 में पहली बार सरपंच का चुनाव जीतकर बादल राजनीति के मैदान में आए थे। तब उनकी उम्र महज 20 साल थी। वे लगातार लंबी से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। पिछली बार उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह को यहां से मात दी थी।
मालवा में जीत मतलब पंजाब की सत्ता हाथ में
पंजाब के मालवा क्षेत्र में 69 सीटें आती हैं। माना जाता है, जो पार्टी मालवा जीत लेती है वही पंजाब में सरकार बनाती है। इसका अपवाद केवल कांग्रेस है, जिसने 2007 में इस क्षेत्र में जीत हासिल की। लेकिन शिअद-भाजपा गठबंधन से मात खा गई।
अब तक कोई भी गैर-सिख नहीं बना मुख्यमंत्री
1966 में पंजाब का पुनर्गठन हुआ था। इसके बाद से पंजाब में कोई भी गैर-सिक्ख मुख्यमंत्री नहीं बना। पंजाब की आबादी में सिखों की संख्या करीब 58 फीसदी है।
सिर्फ दो बार नहीं मिला स्पष्ट बहुमत
पंजाबियों ने आज तक सिर्फ दो बार स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है। पंजाब के चुनावी इतिहास में केवल दो बार ऐसा हुआ है कि जब किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। पहली बार 1967 में और दूसरी बार 1969 में लेकिन दोनों ही बार जोड़तोड़ की सरकार बनी पर पांच साल सरकार नहीं चल सकी। 1969 के बाद से जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें पूर्ण बहुमत मिला है।
डेरों से तय होती है राजनीति की दिशा
पंजाब की राजनीति में धार्मिक डेरों का अच्छा खासा प्रभाव है। पंजाब में करीब 300 डेरे हैं लेकिन इनमें से 12 डेरों के समर्थकों की संख्या लाखों में है। पंजाब की सियासत में डेरों का प्रभाव नया नहीं है। शुरुआत में ही मास्टर तारा सिंह और संत फतेह सिंह की अगुवाई में अकाली नेतृत्व एसजीपीसी और विभिन्न गुरुद्वारों से जुड़े थे। राधास्वामी ब्यास, सच्चा सौदा, निरंकारी, नामधारी, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, डेरा संत भनियारावाला, डेरा सचखंड बल्लां, डेरा बेगोवाल, बाबा कश्मीरा सिंह का डेरा शामिल हैं। सभी जिलों में इनकी शाखाएं और जमीनें हैं। कई डेरे तो देश के विभिन्न हिस्सों और विदेश में भी जड़ें जमा चुके हैं।