आपकी कार अगर हैचबैक है तो आपकी कार का इमरजेंसी गेट खुल जाएगा। यही नहीं, किसी भी कार में एक्सीडेंट होने की सूरत में डोर अपने आप खुल जाएंगे।
सेक्टर-45-46 पर हुए एक्सीडेंट में मारुति कंपनी की स्विफ्ट डिजायर का लाक कार की बैटरी पर इंपैक्ट होने पर सारा सिस्टम खत्म हो गया। एक कार एक्सपर्ट के अनुसार कार का लाकिंग सिस्टम बैटरी से जुड़ा होता है।
छोटी कारों में बैटरी आगे होती है। बड़ी कारों में बैटरी का सिस्टम कार की डिक्की में होता है। ऐसे में कोई टक्कर होने पर कार की बैटरी पर सीधा इंपैक्ट नहीं होता।
इससे लाकिंग सिस्टम खराब नहीं होता। इंपैक्ट होने पर हैचबैक कारों में बैक सीट फोल्ड करके निकलने के लिए इमरजेंसी गेट भी दिया जा रहा है।
पचास फीसदी चाहते हैं सुरक्षा
चंडीगढ़ में कार खरीदने वाले पचास फीसदी लोग कार में न तो एयरबैग की सुविधा चाहते हैं न ही एबीएस और ईबीडी की सुविधा। यह सुविधा छोटी कारों के हाईएंड माडल में हैं। हरेक टॉप माडल की कीमत बेसिक माडल से करीब डेढ़ लाख रुपये ज्यादा होते हैं।
सिक्योरिटी के लिए यह फीचर
आप सुरक्षित कार पर बैठें या फिर बिना सिक्योरिटी फीचर की कार पर। सिटी की सड़कों पर हैं तो स्पीड नियंत्रित रखें। कार चाहे जितनी सुरक्षित हो, जरा टक्कर लगी तो नुकसान संभव है।
जहां तक फुलप्रूफ सुरक्षा है वह सिर्फ लग्जरी कारों में है। छोटी कारों ने ईबीडी, एबीएस, स्मार्ट पैडल, एयरबैग की सुविधा प्रदान की है। तेज गति से टक्कर होने पर इसकी वजह से जान का खतरा हो सकता है।
ये भी समझिए
ईबीडी (इलेक्ट्रानिक ब्रेकिंग सिस्टम)-हाईस्पीड पर टर्न लेने पर हरेक टायर के ब्रेक को मेंटेन किया जाता है। ब्रेक एसिस्ट-पैनिक पोजीशन में चालक का पैर ब्रेक के बजाय रेस पर जाता है।
सेंसर युक्त यह सिस्टम अंदाज लगा लेता है और इससे कार की स्पीड नहीं बढ़ती। स्मार्ट पैडल-स्मार्ट पैडल के माध्यम से कार में पैनिक कंडीशन के दौरान ब्रेक के बजाय रेस दबने पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता।
एबीएस (एंटी लाक ब्रेकिंग सिस्टम)-इंस्टेंट ब्रेक मारने पर अक्सर टायर लाक हो जाते हैं। इससे बचने के लिए एबीएस सिस्टम है। जिससे टायर लाक नहीं होते हैं। इसके माध्यम से एक्सीडेंट का खतरा कम हो जाता है।