इसमें इलाज के करीब 1300 से ज्यादा पैकेज शामिल हैं। हालांकि आयुष्मान में कैंसर की सर्जरी, कीमोथैरेपी, बायपास सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, दांतों की सर्जरी, आंखों की सर्जरी और एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांच भी शामिल है, लेकिन इसमें ट्रांसप्लांट को शामिल नहीं किया गया है। इसी तरह लिवर ट्रांसप्लांट भी आयुष्मान के दायरे में शामिल नहीं है। पीजीआई की ओर से बताया गया है कि इसमें न तो किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लाभ दिया और न ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट वाले मरीजों को।
क्या कहते हैं लाभार्थी
किडनी की बीमारी से पीड़ित राजेश ने बताया कि उसके तीन बच्चे हैं। वह लाभार्थी भी और गरीब भी, लेकिन उसे इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा। कम से कम पांच लाख रुपये तक के ट्रांसप्लांट का प्रावधान इसमें रखना चाहिए था। यह सच है कि किडनी ट्रांसप्लांट के कई पेशेंट हैं और वे लाभार्थी भी हैं, लेकिन इस योजना के तहत वे लाभ नहीं ले सकते।
आयुष्मान योजना के असल लाभार्थी यही लोग हैं। चंद्रशेखर की हालत यह है कि उसके डायलिसिस का भी रुपया नहीं है। उसके मुताबिक यदि उसे डायलिसिस की ही सुविधा मिल जाए तो उसकी जिंदगी बच जाएगी। किडनी ऐसी बीमारी है, जिसके इलाज में व्यक्ति का सब कुछ बिक जाता है। लाखों का कर्ज हो जाता है। इस स्थिति में यदि योजना का लाभ मिलता तो मरीजों को जरूर फायदा मिलता।
आयुष्मान भारत में ट्रांसप्लांट को भी दायरे में रखना चाहिए। यदि ऐसा हो जाए तो मरीजों केलिए बड़ी राहत होगी। मैं इस बारे में जल्द प्रधानमंत्री को पत्र लिखूंगा, ताकि लोगों को इसका फायदा मिल सके। -प्रिंस भंढुला, संयोजक मेडिकल सेल बीजेपी