कुंडली से पलवल तक का सफर बेहतर करने के लिए जिस केएमपी की शुरुआत 15 अगस्त तक करने का दावा सीएम और मंत्री कर रहे थे। उसको बारिश ने तगड़ा झटका दिया है। केएमपी शुरू होने से पहले ही बारिश की वजह से यहां मिट्टी धंसनी शुरू हो गई है और कई जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। ऐसा केएमपी पर किसी एक जगह नहीं बल्कि कई जगह है।
यह मिट्टी केएमपी की दोनों सड़कों के बीच से धंसी हैं और वहां गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे हादसे होने का खतरा मंडराने लगा है। बारिश के कारण केएमपी पर दस दिन से काम बंद है। ऐसे में केएमपी का काम सितंबर में पूरा होता दिख रहा है। केएमपी का निर्माण कर रहे एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों ने खुद भी अगस्त में काम पूरा करने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। वह भी सितंबर में काम पूरा होने की बात कह रहे हैं।
इस समय यह है केएमपी के हालात
केएमपी का गिरा हुआ किनारा
नेशनल हाईवे एक पर केएमपी व केजीपी को जोड़ने वाला पुल बनाया गया है, जिससे केजीपी से सीधे पुल पार करके लोग केएमपी पर चढ़ सकें। लेकिन उस पुल के खत्म होते ही सड़क गायब है। वहां मिट्टी का लेवल जरूर कर दिया गया है मगर सड़क पूरी तरह से नहीं बन सकी है। वहीं जिस जगह पर सड़क बन चुकी है, वहां उसके किनारे टूटने लगे हैं। केएमपी को कुंडली से काफी दूर तक देखा जाए तो वहां अभी काफी काम होना बाकी है और ऐेसे में वह सितंबर माह के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद है।
दिल्ली-एनसीआर को होना है बड़ा फायदा
प्रदूषण व ट्रैफिक जाम से रोजाना जूझती दिल्ली के लिए केएमपी भी केजीपी की तरह बड़ा फायदेमंद होगा। क्योंकि दिल्ली से गुजरकर दूसरे राज्यों में जाने वाले ट्रक व बसों को दिल्ली में नहीं घुसना पड़ेगा। केएमपी पर वाहन चालकों को जाम व ट्रैफिक से नहीं जूझना पड़गा और समय भी बचेगा। एक्सप्रेस वे पर मोड़ कम होने के कारण वाहन सीधे कुंडली से मानेसर होते हुए पलवल तक फर्राटा भर सकते हैं। इससे महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, बंगाल, यूपी, पंजाब, जम्मू के ट्रैफिक पर असर होगा।
यह है प्रोजेक्ट
केएमपी
केएमपी का पत्थर 2003 में हरियाणा के तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला ने लगाया था, लेकिन उसके तीन साल बाद 2006 में काम शुरू हो सका। उस समय काम पूरा करने का समय चार साल तय किया गया था। इसका काम बीच में रोक दिया गया था और यह प्रोजेक्ट अधूरा रह गया था। इसका दोबारा से 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने केजीपी के साथ शिलान्यास किया था और इसका काम शुरू हो सका था।
यह 135.6 किमी लंबा एक्सप्रेस वे है, जिसमें 50 बड़े फ्लाईओवर और 75 छोटे पुल बनाए जाने हैं। इनके अलावा चार रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाने हैं। यह एक्सप्रेस वे सोनीपत में कुंडली से शुरू होकर दिल्ली के चक्कर लगाते हुए खरखौदा, बहादुरगढ़, मानेसर, सोहना से होते हुए पलवल में खत्म होगा। इस प्रोजेक्ट पर तीन हजार करोड़ से ज्यादा रुपया खर्च होना है।
केएमपी का काम बारिश शुरू होने के समय से बंद किया गया है। क्योंकि बारिश में काम नहीं किया जा सकता है। ऐसे में 15 अगस्त तक काम होना मुश्किल है और इसका काम सितंबर तक पूरा हो सकेगा। - जगभूषण, सीनियर मैनेजर एचएसआईआईडीसी