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Kisan Andolan: पंधेर का दावा- राजस्थान में किसान नेताओं को लिया हिरासत में, सवाई माधोपुर में ट्रेन से उतारा

Wed, 06 Mar 2024 06:28 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पंजाब के किसान 13 फरवरी से हरियाणा-पंजाब की सीमा पर धरने पर बैठे हैं। इस बीच किसानों ने कई बार दिल्ली कूच का प्रयास किया मगर हरियाणा पुलिस से झड़प की वजह से वह इसमें सफल नहीं हो सके। अब हरियाणा और पंजाब को छोड़कर बाकी राज्यों के किसानों ने दिल्ली कूच किया है।
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किसान नेता सरवन सिंह पंधेर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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छह मार्च यानी आज पंजाब और हरियाणा को छोड़कर बाकी राज्यों के किसानों ने दिल्ली कूच किया है। इस दौरान पंजाब किसान मजदूर संघर्ष समिति के प्रमुख सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से पहले किसानों को हिरासत में लिया गया है।

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लगभग 130 किसानों को हिरासत में लिया गया है। कल, राजस्थान में भी लगभग 100 प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, कुछ किसानों को सवाई माधोपुर में एक ट्रेन से हिरासत में लिया गया। केंद्र ने किसानों को रोकने के लिए दिल्ली के अंदर और बॉर्डर एरिया पर सभी जगह भारी फोर्स तैनात कर दी है। सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि केंद्र की इस कार्रवाई से यह प्रतीत होता है कि अब आंदोलन देशव्यापी बन चुका है। किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए हर कदम उठाए जा रहे हैं।

पंधेर ने दावा किया कि लगभग 100 किसानों को राजस्थान के कुछ हिस्सों में हिरासत में लिया गया है, जब वह दिल्ली की ओर आ रहे थे। पंधेर ने कहा कि केंद्र की यह कार्रवाई तब सामने आई है जब बीते रविवार को उन्होंने छह मार्च को विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचने के लिए आह्वान किया था। 
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अब 10 मार्च को चार घंटे का रेल रोको देशव्यापी आह्वान भी किया गया है। ऐसे में सरकार इसके खिलाफ भी कोई कदम उठा सकती है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित अपनी मांगों को स्वीकार करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों द्वारा दिल्ली चलो मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं। 

दोनों मंचों ने फैसला किया कि जहां पंजाब और हरियाणा के किसान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन का समर्थन करना जारी रखेंगे, वहीं अन्य राज्यों के किसानों और खेत मजदूरों अब 10 मार्च को रेल रोको को समर्थन देना चाहिए। पंधेर ने कहा जंतर-मंतर और दिल्ली के कुछ अन्य हिस्सों में धारा 144 के तहत आदेश लागू कर दिए गए हैं। टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर इतनी बैरिकेडिंग क्यों है? इसका मतलब है कि केंद्र ने मान लिया है कि यह आंदोलन अकेले पंजाब और हरियाणा का नहीं, बल्कि देशव्यापी है।
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