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किसानों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा मंत्री, भगवंत मान बोले- अन्नदाताओं की हर संभव मदद करेगी आप

Wed, 23 Dec 2020 08:29 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना/संगरूर (पंजाब)
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पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला भूख हड़ताल पर बैठे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला बुधवार को कृषि कानूनों के खिलाफ संगरूर अनाज मंडी में एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठे। भूख हड़ताल को आढ़तियों ने भी समर्थन दिया। सिंगला ने कहा कि किसानों का आंदोलन अब जन-आंदोलन बन चुका है। इसमें लोग जाति, धर्म और पेशे को पीछे छोड़ अपनी भूमिका निभा रहे हैं। 

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पंजाब में आढ़तियों और किसानों के बीच नाखून-मांस वाला रिश्ता है जो सालों से चल रहा है। शिक्षा मंत्री ने काले कानूनों को रद्द करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद का शीतकालीन सत्र जल्द बुलाने की अपील की।

उन्होंने पंजाब के आढ़तियों पर आयकर विभाग के छापे की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आढ़तियों को डराना चाहती है जो इस संघर्ष में अपने किसानों का समर्थन कर रहे हैं। आयकर विभाग के यह छापे केंद्र सरकार की बौखलाहट का नतीजा हैं।
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किसानों की हर संभव मदद करेगी आप : भगवंत मान
संगरूर में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने कहा कि किसानों के प्रति झूठा प्रचार करने वालों के खिलाफ कई दिन से किसानों द्वारा एतराज जताने के साथ उनको अदालत में खींचने की तैयारी की जा रही थी। इस संबंध में किसानों की ओर से आम आदमी पार्टी से संपर्क किया जा रहा था।

इसके बाद आम आदमी पार्टी ने एलान किया कि वह किसानों के खिलाफ गलत बयानबाजी करने वाले नेताओं व लोगों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई में किसानों की हर संभव कानूनी मदद करेगी। पार्टी के वकील साथियों के साथ विचार-विमर्श कर किसानों की मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपना अड़ियल रवैया छोड़कर किसानों की मांगे स्वीकार करे। 

लुधियाना : भूख हड़ताल कर किसानों को दिया समर्थन
पंजाब कांग्रेस सेवा दल के प्रधान निर्मल सिंह कैड़ा की अगुवाई में बुधवार को कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने किसानों के समर्थन में एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठे। कैड़ा ने कहा कि देश का अन्नदाता कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठने को मजबूर है। किसान संगठन तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने की मांग करते हुए आंदोलन के मोर्चे पर डटे हैं। जबकि केंद्र सरकार कानूनों में संशोधन की बात पर अड़ी हुई है। 

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