पानीपत। नगर निगम ने किलावासी बारह अन्य परिवारों को बेदखल कर दिया और नोटिस देकर बसने से अब तक का किराया जमा कराने का नोटिस दिया है।
निगम इससे पहले 84 लोगों को भी नोटिस थमा चुका है। विस चुनाव के समय निगम के इस कदम के बाद सियासी पारा भी चढ़ गया है। किलावासियों ने इसे लेकर कोर्ट जाने और चुनाव के समय जवाब देने की चेतावनी दी है। वहीं नगर निगम अधिकारियों ने इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
नगर निगम ने बुधवार को किलावासी 12 परिवारों को नोटिस थमा दिया। निगम ने लिखा है कि ये लोग संयुक्त आयुक्त की सुनवाई के दौरान अपनी पैरवी नहीं कर सके। इस कारण इनको एक्स पार्टी घोषित कर दिया।
उन्होंने इन लोगों को बसने से लेकर अब 1200 से 3600 रुपये सालाना जुर्माना किराये के रूप में जमा कराने के आदेश दिए हैं। ऐसा न होने पर उन पर कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है। 252 लोगों में से 84 लोगों को पहले नोटिस थमाया जा चुका है।
किला संघर्ष समिति के बैनर तले लोग एकजुट हो गए और नगर निगम की अनदेखी पर रोष व्यक्त किया। समिति प्रधान दीपक सहित बाकी लोगों ने कहा कि वे आजादी के बाद से यहां पर रह रहे हैं। उनके पास मकानों की रजिस्ट्री भी है और लगातार अपना पक्ष रखा रहे हैं।
वे इसको लेकर मुख्यमंत्री को भी कई बार गुहार लगा चुके हैं। सीएम ने 14 अगस्त को पानीपत पहुंचने पर भी समस्या समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इसमें कोई समाधान नहीं हो सका है।
नगर निगम के हाउस की मीटिंग में भी किलावासियों को बसाए रखने पर सहमति जताई थी और इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए स्थानीय शहरी निकाय विभाग को भेज दिया था। दो जून को बैठक में पास एजेंटों को आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। यह शहरी निकाय विभाग और मुख्य सचिव के बीच घूम रहा है।
समान नागरिक संहिता अभियान के संयोजक नेमचंद जैन ने किले की जमीन के मामले में हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट की प्रथम खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए इसे नजूम की जमीन माना था और छह जुलाई 2012 को प्रदेश सरकार को नोटिस देकर किले की जमीन से कब्जे हटवाने के आदेश दिए थे। नेमीचंद जैन का दावा है कि किले की 54 हजार वर्ग गज में से 45 हजार जमीन पर कब्जे हैं। इसके बाद इस मामले पर संयुक्त आयुक्त की कोर्ट में सुनवाई चली और सभी 252 लोगों को नोटिस दिए।
किलावासी आजादी के वक्त आकर बसे थे और उनके पास इसकी रजिस्ट्री भी हैं। वे सरकार और प्रशासन को कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। किलावासी 12 लोगों को बुधवार को नोटिए दिए गए हैं और 84 लोगों को पहले नोटिस दिए जा चुके हैं। वे आज भी खुद को रिफ्यूजी महसूस करते हैं। वे निगम के इस कदम का विरोध करते हैं और इसको लेकर कानूनी लड़ाई लगने के साथ विधानसभा चुनाव में भी जवाब देंगे।
दीपक अरोड़ा, प्रधान, किला संघर्ष समिति