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Chandigarh News: डीएलएफ-वाड्रा जमीन सौदे की धीमी जांच पर खेमका ने उठाए सवाल

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वरिष्ठ आईएएस ने एक्स लिखा-पापियों की मौज, शासक की मंशा कमजोर क्यों
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा के बहुचर्चित डीएलएफ-वाड्रा जमीन सौदे की धीमी जांच प्रक्रिया पर राज्य के वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, ''''वाड्रा-डीएलएफ सौदे की जांच सुस्त क्यों? दस साल हो गए। और कितनी प्रतीक्षा। ढींगरा आयोग की रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में। पापियों की मौज। शासक की मंशा कमजोर क्यों? प्रधानमंत्री जी का देश को वर्ष 2014 में दिया गया वचन एक बार ध्यान तो किया जाए।'''' उनकी इस टिप्पणी पर तो सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं आई, मगर सरकार की ओर से किसी ने कोई बयान जारी नहीं किया गया।
खेमका समय-समय पर सोशल मीडिया पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं। खेमका ने ही इस जमीन सौदे घोटाले को उजागर किया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि रॉबर्ट वाड्रा और रियल स्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच गुरुग्राम के शिखोहपुर गांव में फर्जी दस्तावेजों के जरिए 3.53 एकड़ की जमीन का सौदा हुआ था। वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने 3.53 एकड़ रुपये की जमीन 7.5 करोड़ रुपये खरीदी थी जो उन्होंने डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी थी। इस सौदे की जांच करने के बाद आईएएस खेमका ने जमीन की रजिस्ट्री को ही रद्द कर दिया था। खेमका ने 11 महीने पहले भी लगातार दो ट्वीट कर इस जमीन सौदे को लेकर सवाल उठाए थे। वह इस मामले में वित्तीय लेनदेन की जांच को लेकर सरकार द्वारा गठित की गई नई एसआईटी पर भी सवाल खड़े कर चुके हैं।
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खेमका के सवाल के बाद आईएएस संजीव वर्मा कूदे
राज्य के सीनियर आईएएस अशोक खेमका और आईएएस संजीव वर्मा के बीच काफी दिनों से विवाद चला आ रहा है। दोनों एक दूसरे पर गंभीर आरोप भी लगा चुके हैं। पिछले दिनों ही हरियाणा सरकार ने दोनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सरकार ने गृह सचिव व वित्तायुक्त टीवीएसएन प्रसाद को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। शनिवार को खेमका की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद आईएएस संजीव वर्मा ने भी एक्स पर लिखा कि लोग अपने दोष छिपाने के लिए दूसरों के पाप गिनवाने लगते हैं। ये भूलकर कि ऐसा करने से वो खुद पवित्र या निर्दोष नहीं हो जाते।
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