पंजाब में बेअदबी की घटनाओं के बाद एक बार फिर से विदेशों में बैठे खालिस्तानी समर्थक एक्टिव हो गए हैं। वह मौकों को भुनाने में जुट गए हैं, क्योंकि इन घटनाओं के बाद लोगों में काफी गुस्सा है। वह खासकर उन युवाओं को निशाना बना रहे हैं, जो धार्मिक प्रवृति के हैं। इसके लिए वह उन्हें रुपयों से लेकर सभी जरूरत की चीजें मुहैया करवा रहे हैं। यह बात बेअदबी कांड के बाद पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ में साफ हो चुकी है।
वहीं यह सभी जानकारी स्पेशल सेल के अधिकारियों ने दी है। वर्ष 1980 से 1993 तक पंजाब ने आतंक का दंश झेला है। गत तीन साल से आतंकी गतिविधियां फिर तेजी से बढ़ी हैं। 2015 में गुरदासपुर जिले में दीनानगर और 2016 में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद धार्मिक नेताओं की हत्या और धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं ने सूबे में आतंकी माहौल बढ़ाया है। 1993 में आतंक के खात्मे के साथ खालिस्तान की मांग करने वाले ज्यादातर उग्रपंथी भले ही पंजाब छोड़कर पाकिस्तान, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में पनाह ले चुके हों।
लेकिन समय-समय पर होने वाली आतंकी घटनाओं से साफ है कि उनके नापाक मंसूबे अभी जिंदा हैं। अमृतसर से सटे गांव अदलीवाल में निरंकारी सत्संग भवन पर हमले के तार भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रायोजित केएलएफ (खालिस्तान लिबरेशन फोर्स) से जुड़े बताए जाते हैं। इसके अलावा लुधियाना में बब्बर खालसा के आतंकी पकड़े गए। अब एक बार फिर आतंकी पकड़े गए हैं, जो इस बात को मजबूत कर रहे हैं।
दर्जन भर और मॉड्यूल होने की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में मार्च 2017 से अक्तूबर 2018 तक 17 मॉड्यूल तोड़े जा चुके हैं, जबकि इस साल में करीब 3 नए मॉड्यूल पकड़े गए हैं। अभी भी एक दर्जन और मॉड्यूल होने की आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत पंजाब और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर अक्तूबर में जालंधर के दो शिक्षण संस्थानों पर छापेमारी करके खतरनाक हथियारों की बरामदगी की।
इसके अलावा पंजाब के कई हिस्सों में करीब तीन साल में 20 से ज्यादा गिरफ्तारी हुई हैं। यह गिरफ्तारियां लुधियाना, फरीदकोट, अमृतसर, मोहाली, जालंधर और पटियाला समेत कई इलाकों से हुई हैं।
सोशल मीडिया में नफरत फैलाने वालों पर पुलिस की नजर
पुलिस अब सोशल मीडिया पर सक्रिय उन लोगों पर नजर रख रही है, जो लोगों को धर्म के नाम पर गुमराह करते हैं। इसके अलावा खालिस्तानी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें कुछ ऑनलाइन वेब पोर्टल व चैनल हैं। पुलिस के अनुसार इस संबंध में उच्च अधिकारियों को जानकारी दे गई है। जल्दी ही इन पर गाज गिर सकती है।