क्या कहता है सरकारी रिकॉर्ड
अगर यूटी पुलिस के रिकॉर्ड पर ही नजर डालें तो जांच टीमों ने वर्ष 2020 में मलोया थाने के कांस्टेबल नवीन कुमार, कृष्ण मलिक और शिव कुमार काे 14 हजार रुपये की रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था। वर्ष 2023 में सेक्टर-11 थाने में तैनात एएसआई रणदीप सिंह राणा को 50 हजार की रिश्वत के मामले में पकड़ा था। सेक्टर-39 के एडिशनल एसएचओ नवीन फोगाट को वर्ष 2023 में एक करोड़ की लूट मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने एक कारोबारी का अपहरण कर यह राशि छीन ली थी। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। वर्ष 2019 में मौलीजागरां थाने के एसएचओ बलजीत सिंह व कांस्टेबल सुरिंद्र राठी को 45 हजार, वर्ष 2017 में सारंगपुर थाने के हैंड कांस्टेबल रामकुमार को 10 हजार रिश्वत के आरोप में पकड़ा गया। इसके अलावा वर्ष 2018 में इंडस्ट्रियल थाना के एसआई सेवा सिंह व कांस्टेबल सुमित को पांच हजार की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2023 में मनीमाजरा थाने के एएसआई बलकार सिंह को 25 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
ये वर्दीधारी भी रिश्वतकांड में फंसे
रिकॉर्ड के मुातबिक वर्ष 2013 में सेक्टर-19 थाने में तैनात एएसआई दविंद्र कुमार को 3500 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में आरोपी जवान को वर्ष 2019 में चार साल की सजा हुई थी। वर्ष 2021 में सेक्टर-34 थाने में तैनात सरबजीत कौर को 10 हजार रुपये रिश्वत के लिए गिरफ्तार किया गया था और मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सेक्टर-31 थाने में तैनात मोहन को वर्ष 2017 में एक लाख रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया था और यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। सेक्टर-3 थाने के एसआई सेवक सिंह को 15 हजार लेते पकड़ा गया था जिसमें उसे कोर्ट से चार साल की सजा भी हो चुकी है।
पीओ सेल का एएसआई व सेक्टर-17 थाने का एसआई 10 हजार लेता गिरफ्तार
वहीं, हाल ही में बीते 10 अप्रैल को सीबीआई की टीम ने पीओ सेल में तैनात एएसआई हरमीत सिंह और सेक्टर-17 थाने के एडिशनल एसएचओ बलविंद्र सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। इस मामले में सेक्टर-41-ए निवासी अजय कुमार ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि एक मामले में एएसआई व एसआई उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करने के लिए एक लाख रुपये रिश्वत मांग रहे हैं। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच 40 हजार में सौदा तय हुआ था और इसी के चलते शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये लेते सीबीआई ने दोनों आरोपी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया था।
सीबीआई कोर्ट में कई विचाराधीन मामले
अगर सीबीआई कोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां करीब 23 मामले केवल यूटी पुलिस जवानों के भ्रष्टाचार से संबंधित विचाराधीन है। बाकायदा कुछ पुराने मामलों में तो सीबीआई कोर्ट खाकी पहने भ्रष्टाचारियों को सजा भी सुना चुकी है जिसमें एसपी से लेकर डीएसपी व इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। सरकारी रिकॉर्ड पर ही गौर करें तो अक्तूबर 2012 में सीबीआई ने 2008 बैच के आईपीएस देशराज सिंह को एक लाख रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ यूटी पुलिस के ही एक एसएचओ ने शिकायत दी थी, जिसके आधार पर एसपी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में वर्ष 2018 में आरोपी एसपी को तीन साल की सजा भी हुई थी। वर्ष 2015 में सीबीआई ने 40 लाख रुपये की रिश्वत के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारी पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था और वह अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इसके अलावा कुछ महीनों पहले ही सीबीआई ने एक इंस्पेक्टर व उसकी पत्नी पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है।
ऑन ड्यूटी वर्दीधारियों पर केस के लिए लेनी पड़ती है परमिशन
यूटी पुलिस के एक आलाधिकारी ने बताया कि ऑन ड्यूटी अगर किसी बड़े स्तर के अधिकारी पर रिश्वत के आरोप लगते हैं तो उस पर कार्रवाई के लिए पहले प्राथमिक तौर पर इंटरनल जांच होती है। इसके बाद फाइल मंजूरी के लिए मुख्यालय में भेजी जाती है और वहां संबंधित अधिकारियों द्वारा भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मंजूरी दी जाती है। हाल ही में पूर्व एसपी रोशन लाल सहित दो इंस्पेक्टरों व सब इंस्पेक्टर पर केस दर्ज करने से पहले भी फाइल को मुख्यालय में भेजा गया था।