कठुआ हत्या और दुराचार मामले में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने बताया कि बचाव पक्ष के वकीलों ने माना है कि बालों वाला लिफाफा खाली मिला। उन्होंने जांच कर ली है। बालों संबंधी जांच के सारे दस्तावेज सेंट्रल फोरेंसिक साइंटिफिक लैब के पास हैं, जिसके चलते लिफाफे से कुछ नहीं निकला। अब फोरेंसिक लैब वालों से जिरह के दौरान ही इसका नतीजा सामने आएगा।
गौर रहे कि गत दिवस सरकारी वकीलों ने चार पैकेट कोर्ट के समक्ष पेश किए थे जो उन्हें क्राइम ब्रांच वालों ने किए, लेकिन एक भी पैकेट में बाल नहीं निकले। हालांकि सरकारी वकील का कहना था कि फोरेंसिक लैब वालों की रिपोर्ट के अनुसार सब बाल जांच में खप गए। वे बाल मृतका के डीएनए टेस्ट में सामने आए थे।
उन्होंने बताया कि सरकारी वकीलों ने एक ज्वाइंट एप्लीकेशन अदालत में दर्ज की है, जिसमें एक अंग्रेजी अखबार के पत्रकार और उसके संपादक के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। इस अखबार ने साहनी की तरफ से सरकारी वकील के बारे में विवादास्पद बयान छापा है। जबकि सरकारी वकील चोपड़ा कुछ दिन से अदालत में आ ही नहीं रहे हैं। गत दिवस भी वह कोर्ट से नदारद थे।
साहनी ने भी इस बात का खंडन किया है लेकिन साहनी ने कहा कि इस अर्जी के स्वीकार किए जाने से इस केस में और परेशानी का सामना करना पडेगा। सरकारी वकीलों ने पत्रकार और संपादक के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने की बात करते हुए अपनी अर्जी वापस ले ली। कोर्ट में मंगलवार को भी दसवें गवाह की जिरह जारी थी।