कठुआ रेप और हत्या के मामले में सातों आरोपियों ने जज से जो शिकायत की थी, उसके जवाब में गुरदासपुर जेल प्रशासन ने सफाई दी और मामला साफ किया। मामले में बचाव पक्ष के वकील मास्टर मोहन लाल ने अदालत को बताया कि गुरदासपुर सेंट्रल जेल की कैपेसिटी 826 कैदी रखने की है, जबकि अभी उसमें 1264 से 1300 के करीब कैदी और हवालाती रखे हुए हैं। जेल में पहले ही क्षमता से ज्यादा कैदी हैं।
इस बारे में जेल प्रशासन ने कहा कि वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। फिर भी जेल एसपी करणजीत सिंह ने आश्वासन दिया कि कुछ न कुछ हल जरूर निकाला जाएगा। मामले के आरोपियों को खाना न दिए जाने के संबंध में जेल प्रशासन का कहना है कि यह अपने आप में पहला केस है, जिसकी रोज सुनवाई हो रही है। आरोपियों के लिए लंच का इंतजाम करने के लिए उन्हें पहले अपने उच्च अधिकारियों से फंड दिए जाने के बारे में बात करनी पड़ेगी। क्योंकि पता नहीं यह केस कब तक चले।
बता दें कि वीरवार को सेशन जज तजविंदर सिंह की अदालत में आरोपियों ने शिकायत दी थी कि उन्हें उम्रकैद के कैदियों के साथ रखा गया। न तो उन्हें खाना दिया गया न सोने के लिए बिस्तर। तीन को एक कोठरी तथा चार को दूसरी कोठरी में रखा गया। जहां उन्होंने एक तौलिया बिछाकर जैसे-तैसे रात बिताई। कोर्ट ने बचाव पक्ष के वकील मास्टर मोहन लाल को केंद्रीय जेल में इस बाबत जांच के लिए भेजा था।