कंबोपुरा के पूर्व सरपंच करम सिंह की मौत प्रकरण में शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में गवाही हुई। गवाही देने वालों में दो युवक करम सिंह के सैलून में काम करते थे और एक अन्य व्यक्ति था। इस केस में पूर्व मंत्री ओपी जैन व पूर्व सीपीएस जिले राम शर्मा आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी हैं।
सात जून 2011 को सैलून में काम करने वाले रमेश, सतपाल व एक ग्राहक दिनेश मौजूद था। इनमें सतपाल और रमेश ने कोर्ट में कहा कि करम सिंह उन्हें कहकर गए थे कि वह जिले राम के घर जा रहे हैं। कुछ देर बाद रमेश के पास करम सिंह का फोन आया।
उन्होंने कहा कि वह जिले राम के घर से तीन अन्य लोगों के साथ किसी काम से निकले हैं। कुछ देर बाद करम सिंह ने फिर से रमेश को फोन किया और कुछ नोट करने के लिए कहा। रमेश ने कोर्ट में कहा, चूंकि वह अनपढ़ है। लिहाजा उसने दिनेश को फोन दे दिया, जिसने कागज पर कुछ नोट किया।
कुछ देर बाद फिर से करम सिंह के फोन से रमेश को फोन आया। इस बार कोई अंजान व्यक्ति बोल रहा था। उसने कहा कि करम सिंह ने कुछ खा लिया है और फोन करने वाले ने पता भी बताया।
वहीं, रमेश ने पीछे करम सिंह की आवाज सुनी कि मर गया, मार दिया...। रमेश ने तुरंत करम सिंह के बेटे राजेंद्र को फोन किया और बताए गए पते पर पहुंचे। वहां से करम सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जिले राम और जैन पर तय हो चुके हैं आरोप
सीबीआई की विशेष अदालत से जिले राम, ओपी जैन और उनके पीए राजेंद्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप तय हो चुके हैं। सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि जिले राम व ओपी जैन ने पैसे लेकर नौकरियां नहीं लगवाई और न ही करम सिंह को पैसे लौटाए, जिसकी वहज से वह काफी परेशान थे।