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पंजाब में अकाली-भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं, मेहताब गिल कमेटी ने अंतरिम रिपोर्ट सौंपी

Tue, 12 Sep 2017 10:22 AM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं, क्योंकि जस्टिस मेहताब सिंह गिल आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में अकाली-भाजपा शासन के बीते दस साल के दौरान पुलिस द्वारा आम लोगों को झूठे मामलों में फंसाने के कांग्रेस के आरोपों पर मुहर लग गई है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा ऐसे मामलों की शिनाख्त के लिए गठित आयोग ने सरकार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है।
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इसमें 178 झूठी एफआईआर का ब्योरा देते हुए दोषी पुलिस अफसरों के खिलाफ न सिर्फ  कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है, बल्कि ज्यादातर मामलों में पीड़ितों को हर्जाना भी दोषी पुलिस अफसरों की जेब से दिलाने को कहा है। जांच के दौरान आयोग के समक्ष कई ऐसे मामले भी आए जिनमें निर्दोष लोगों को दुराचार जैसे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया गया। ऐसे मामलों में आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दोषी अफसरों पर मुकदमा चलाने के साथ-साथ उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश भी की है।

23 अगस्त, 2017 को जस्टिस मेहताब सिंह गिल द्वारा राज्य के गृह मामले व न्याय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट में 178 केसों की जांच करके विस्तार से लिखा गया है। इनमें कई मामलों में आरोपियों को अदालतों ने बरी कर दिया है जबकि कई में कैंसलेशन रिपोर्ट अदालतों ने स्वीकार कर ली है। इसके अलावा कई मामलों में हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी है और कई केस में दर्ज एफआईआर पर केंद्र के एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट द्वारा जांच की जा रही है। हालांकि आयोग ने फाइनल रिपोर्ट अभी नहीं सौंपी है।
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केसों पर यह है जांच आयोग की टिप्पणी

कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : File Photo
- जस्टिस मेहताब गिल आयोग ने अपने अंतरिम रिपोर्ट में जिन 178 केसों का जिक्र किया है, उनमें 1-79 नंबर तक केसों में सरकार की जांच एजेंसियों ने उच्च स्तरीय जांच के बाद इन सभी केसों को झूठा पाया है। इन केसों को आयोग ने भी झूठा ही पाया। आयोग ने इन केसों के बारे में साफ कर दिया कि जब जांच में सभी केस झूठे पाए गए हैं और एफआईआर रद्द करने के लिए कहा जा चुका है तो इन पर आगे दोबारा जांच करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
- केस नंबर 80-98 तक आयोग द्वारा की गई जांच में सभी एफआईआर रद्द करने या आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने की सिफारिश की गई है।
- आयोग ने केस नंबर 99-178 तक सभी मामलों में अलग-अलग सिफारिशें की हैं।
-आयोग ने राज्य सरकार से सिफारिश की गई है कि सभी झूठे केसों में एफआईआर रद्द कराने के लिए संबंधित अदालतों में कानून सम्मत कार्रवाई करते हुए आवेदन दाखिल किए जाएं। हालांकि आयोग ने भादंसं की धारा 182 के तहत क्रॉस केसों में एफआईआर रद्द करने के बारे फिलहाल कुछ नहीं कहा है। आयोग ने यह भी कहा है कि ऐसी झूठी शिकायतें देने वालों को कानून से बचकर निकलने नहीं देना चाहिए और सरकार ईमानदार व निर्दोष नागरिकों को बचाने के लिए झूठे शिकायतकर्ताओं पर मुकदमे चलाए।
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डीजीपी को निर्देश- कार्रवाई करो या केस सरकार को सौंपें

अमरिंदर सिंह - फोटो : SELF
जस्टिस गिल आयोग की अंतरिम रिपोर्ट में की गई सिफारिशों को गंभीरता से लेते हुए गृह मामले व न्याय विभाग ने राज्य के डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि आयोग की सिफारिशों के अनुरूप दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही झूठे केसों में एफआईआर रद्द कराने के लिए संबंधित अदालतों में आवेदन दाखिल करने को कहा गया है।

गृह विभाग ने केस नंबर 99-178 तक आयोग द्वारा की गई अलग-अलग सिफारिशों के आधार पर संबंधित सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए हैं। गृह विभाग ने डीजीपी को यह भी साफ कर दिया है कि अगर दोषियों पर पुलिस विभाग एक्शन करने में कोताही बरतता है या यह मानता है कि कार्रवाई की कोई जरूरत नहीं है तो

ऐसे सभी केस राज्य सरकार के सुपुर्द कर दिए जाएं ताकि सरकार खुद कार्रवाई कर सके। विभाग ने डीजीपी से अपने अधीनस्थ अधिकारियों के लिए आयोग की सिफारिशों के अनुरूप दिशानिर्देश जारी करने और आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए सभी जिला मजिस्ट्रेटों को नोडल अफसर घोषित करने के निर्देश भी दिए हैं।
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