चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में चल रहे धरने के पांचवें दिन शुक्रवार को विरोध तेज हो गया। धरने में शामिल होने पहुंचीं शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल, एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी, पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, कांग्रेस विधायक प्रगट सिंह और आप विधायक अमृतपाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि पीयू पंजाब की आत्मा है, इसे किसी कीमत पर केंद्र के हवाले नहीं होने देंगे। धरने में गायक मनकीरत औलख के आने की भी संभावना थी लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते वे नहीं पहुंचे।
हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाबियों की पहचान है। यह पंजाब के लोगों के पैसे से बनी है, इसमें पंजाब की आत्मा बसती है। केंद्र सरकार को चेतावनी देती हूं कि जैसे किसानों ने आपको झुकाया था वैसे ही अब भी झुकाया जाएगा। यह पंजाब पर हमला है और इसका खामियाजा केंद्र को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गांव-गांव से लोग इस आंदोलन में शामिल होंगे और वह खुद उप-राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर मामला उठाएंगी।
एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि 3 नवंबर को एसजीपीसी की बैठक में भी पीयू पर प्रस्ताव पारित किया गया था। धीरे-धीरे केंद्र सरकार पंजाब के अधिकारों पर डाका डाल रही है। यह यूनिवर्सिटी पंजाबी सभ्यता और बोली की पहचान है। उन्होंने मोर्चा को समर्थन देते हुए कहा कि 10 नवंबर के बड़े प्रदर्शन के दौरान लंगर की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
विधायक प्रगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि सीएम स्टेज चला रहे हैं, राज्य नहीं। पंजाब का फेडरल ढांचा और शिक्षा प्रणाली पर हमला हो रहा है। सीनेट का सिस्टम 59 साल से चला आ रहा है, उसे तहस-नहस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी और एनईपी की तरह ही पंजाब यूनिवर्सिटी पर भी कब्जे की कोशिश हो रही है। हमने विधानसभा में एनईपी को रिजेक्ट करने की बात कही थी, पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई।
पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि यह धरती शहीदों के लहू से सिंची है। 1947 में पंजाब ने दो हिस्से करवाए, तब यह यूनिवर्सिटी बनी। अब इसे केंद्र के हवाले नहीं जाने देंगे, चाहे कोई भी कीमत चुकानी पड़े। उन्होंने युवाओं से राजनीति में आने की अपील करते हुए कहा कि देश को अब बुजुर्ग नहीं, नौजवान चलाएंगे सीनेट युवाओं के लिए राजनीतिक मंच है।