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Chandigarh News: जज नोटकांड - रिश्वत मामला फैसले के आखिरी पड़ाव में, हाईकोर्ट पर टिका फैसला, 7 नवंबर को सुनवाई

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चंडीगढ़। 16 साल पुराने चर्चित जज नोटकांड में 15 लाख की रिश्वत मामले में शनिवार को सीबीआई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में नामजद आरोपी राजीव गुप्ता की ओर से विदेश जाने की अनुमति के लिए याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया था लेकिन आरोपी की ओर से विदेश जाने की तारीख बदलने को अदालत ने नामंजूर कर दिया है। अदालत का तर्क है कि यह मामला फैसले के आखिरी पड़ाव में है, इसलिए विदेश जाने की तारीख नहीं बदल सकते हैं। इस मामले में आखिरी फैसला हाईकोर्ट पर टिका है, जिसकी सुनवाई 7 नवंबर को होनी है।
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गौरतलब है कि पंचकूला के एक प्लॉट के केस में एकतरफा फैसला देने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की जज निर्मल यादव के नाम पर 15 लाख रुपये की रिश्वत ली गई थी। नाम की गलती के चलते महाधिवक्ता संजीव बंसल का मुंशी प्रकाश राम यह पैसे हाईकोर्ट की न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की कोठी पर ले गया था। चंडीगढ़ पुलिस ने इस मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस निर्मल यादव समेत पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव बंसल, बिल्डर राजीव गुप्ता, दिल्ली के बिजनेसमैन रविंदर सिंह भसीन और निर्मल सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था लेकिन बाद में मामला सीबीआई के पास ट्रांसफर हो गया था। इस मामले में सीबीआई अदालत में दोनों पक्षों के बयान दर्ज होने के साथ ट्रायल पूरा हो चुका है लेकिन बीच में यह मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चला गया था और इस मामले में सीबीआई अदालत को हाईकोर्ट की कार्रवाई पूरी नहीं होने तक फैसला देने पर रोक लगा दी गई थी।
इस मामले में अदालत की ओर से आरोपी जस्टिस निर्मल यादव को कोर्ट में पेश होने पर पूर्णता रोक लगा रखी है और नामजद आरोपी संजीव बंसल की पहले ही मौत हो चुकी है। इस मामले में आरोपी राजीव गुप्ता ने विदेश जाने के लिए परमिशन मांगी थी जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया था लेकिन अब आरोपी ने फिर विदेश यात्रा पर जाने के लिए तारीख बदलने का आवेदन किया है। आरोपी अब 15 दिसंबर 2024 से 13 जनवरी 2025 तक विदेश यात्रा करना चाहता है लेकिन अदालत ने अपने फैसले में तर्क दिया कि यह मामला पहले ही अंतिम चरण में पहुंच चुका है और 7 नवंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है इसलिए इस चरण में विदेश जाने के आदेश को संशोधित करने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि इस पर हाईकोर्ट के 7 नवंबर 2024 के निर्णय के बाद ही विचार किया जाएगा।
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