गठबंधन की नई सरकार हरियाणा में बन चुकी है। बस मंत्रिमंडल के गठन होना बाकी है। भाजपा नेताओं की माने तो अगले एक हफ्ते के अंतराल में सरकार अपना मंत्रिमंडल तैयार कर लेगी। इसके साथ ही दस नवंबर से पहले नई सरकार अपना पहला विधानसभा सत्र भी बुलाएगी। लेकिन इस नई सरकार के गठन के बाद कई पहलू और परिस्थतियां ऐसी हैं, जिन पर गौर करते हुए तालमेल बिठाकर ‘हम साथ-साथ हैं’ के फार्मूला पर आगे बढ़ना होगा।
दरअसल, इस विधानसभा चुनाव का फ्लैश बैक देखें, तो भाजपा और जजपा दोनों ही जुदा सियासी राहों के साथ चुनावी रण में उतरी थी। चुनाव प्रचार के दौरान जहां मौका मिला वहां भाजपा ने जजपा को निशाने पर लिया और जजपा भी भाजपा पर सियासी वार करने से नहीं चूकी।
मगर कहा जाता कि राजनीति में कुछ भी संभव है, लिहाजा यह बात हरियाणा की राजनीति में अबकी बार चरितार्थ हो गई। जनादेश के बाद चुनाव में धुर-विरोधी रही भाजपा और जजपा को आज उनकी सियासी मजबूरियां नजदीक खींच लाई। अब जरूरत है मनोहर राज की ‘2.0’ पारी में ताऊ देवीलाल के लोकराज के सूत्र को साथ लेकर आगे बढ़ने की।
दरअसल, जजपा ने यह चुनाव विभिन्न स्थानीय मुद्दों, पूर्व भाजपा सरकार की नाकामियों के साथ-साथ पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल के ‘लोकराज’ के सपने को आगे रखकर ही लड़ा था। ताऊ देवीलाल ने कहा था लोकराज, लोकलाज से चलता है। सियासत में ताऊ का यही सूत्र वाक्य, उन दिनों प्रदेश में बड़ा नारा बन गया।
जजपा की कमान संभालने वाले दुष्यंत चौटाला ने भी प्रदेश की जनता से वादा किया था कि वह यदि सत्ता में आए तो ताऊ के सिंद्धातों पर चलते हुए लोकराज प्रदेश में स्थापित होगा। इस दौरान दुष्यंत ने जनता से ढेरों लोकलुभावने वादे भी किए थे। दूसरी ओर, यदि देखें भाजपा ने सियासत में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों को ही सर्वोपरि माना है।
कई योजनाएं दीनदयाल उपाध्याय के नाम से भी चल रही है। इस बार भी सीएम बने मनोहर लाल इन्हीं सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। ऐसे में जरूरी होगा कि मनोहर राज में ताऊ देवीलाल के लोकराज के सपनों का तालमेल बना रहे। इसमें सबसे बड़ी चुनौती होगी भाजपा के संकल्प पत्र और जजपा के जन सेवा पत्र में किए गए वादों को लागू करवाना।
पूर्व सांसद अजय चौटाला ने कहा कि भाजपा के साथ हमारा पूरा तालमेल रहा है। इसी के जरिए हम जजपा के जन सेवा पत्र के वादे लागू करवाने का प्रयास करेंगे।