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SGPC जत्थेदार ज्ञानी गुरमुख को पद से हटाया, ज्ञानी हरप्रीत को कमान

Fri, 21 Apr 2017 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहगढ़ साहिब(पंजाब)
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ज्ञानी गुरमुख सिंह
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डेरामुखी को माफी देने के मामले में बादल पिता-पुत्र पर आरोप लगाने वाले तख्त श्री दमदमा साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी गुरमुख सिंह को एसजीपीसी ने उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह श्री मुक्तसर साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी हरप्रीत सिंह को दमदमा साहिब का नया कार्यकारी जत्थेदार लगाया गया है।
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यह फैसला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकारिणी सदस्यों की गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में हुई शुक्रवार को बैठक में लिया गया। बैठक के बाद एसजीपीसी अध्यक्ष कृपाल सिंह बडूंगर ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिरोमणि कमेटी ने तख्त श्री दमदमा साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी गुरमुख सिंह को हटाकर उनकी जगह ज्ञानी हरप्रीत सिंह हेड ग्रंथी श्री मुक्तसर साहिब को दमदमा साहिब का नया कार्यकारी जत्थेदार लगाया है।

गुरमुख सिंह को तख्त श्री दमदमा साहिब से निलंबित कर हरियाणा के गुरुद्वारा पातशाही 9वीं धमधान साहिब जींद में हेड ग्रंथी लगाया गया है। बडूंगर ने कहा कि ज्ञानी गुरमुख सिंह कुछ दिनों से मर्यादा से परे होकर बयानबाजी कर रहे थे। ज्ञानी गुरमुख सिंह की जगह गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह जी अमृतसर के ग्रंथी भाई मलकीत सिंह को अकाल तख्त साहिब का हेड ग्रंथी लगाया गया है।
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डेरा मामले पर हुआ था विवाद

ज्ञानी गुरमुख सिंह

ज्ञात रहे कि जनवरी 2015 में फतेहगढ़ साहिब में हुई शिरोमणि समिति कार्यकारिणी ने तख्त श्री दमदमा साहब के जत्थेदार ज्ञानी बलवंत सिंह नंदगढ़ को उनकी तरफ से बेबाक विचारों के कारण नौकरी से हटाकर ज्ञानी गुरमुख सिंह को तख्त साहिब के आरजी जत्थेदार के तौर पर लगा दिया था।

कार्यकारी जत्थेदार गुरमुख सिंह केवल 8 महीने बाद ही डेरा सिरसा प्रमुख को दी गई बिन मांगी माफी के श्री अकाल तख्त साहिब से लिए फैसले के कारण चर्चा में आए थे और फिर यह चर्चा उनको जत्थेदारी से फारिग करने का कारण बनी। यह भी संयोग ही माना जाएगा कि उनको कार्यकारी जत्थेदार लगाए जाने और फिर शुक्रवार 21 अप्रैल को हटाए जाने के दोनों फैसले कमेटी की कार्यकारिणी की फतेहगढ़ साहिब की बैठक में लिए गए। 

तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार और अकाल तख्त के हेड ग्रंथी भाई गुरमख सिंह ने आरोप लगाया था कि डेरा मुखी के माफी वाले पत्र संबंधी पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उन पर दबाव बनाया था। इस मामले में दोनों बादल पिता-पुत्र पूरी तरह से जिम्मेवार हैं। इस घटना पर जत्थेदार की ओर से किए गए खुलासे सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं।

इनमें लिखा गया है कि उन्होंने उक्त खुलासे अमृतसर में अपनी रिहाइश पर किए हैं। जत्थेदार ने कहा कि डेरा मुखी को माफ करने के लिए पूरा ड्रामा तो पहले ही रचा जा चुका था और जत्थेदारों को बादल पिता-पुत्र ने चंडीगढ़ में बुलाकर माफी की प्रक्रिया को पूरी करने के लिए सरकारी हुक्म सुनाया था। हालांकि उन्होंने उक्त आदेश को मानने से इंकार कर दिया था ।
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