फतेहाबाद में पुलिस अधीक्षक ओपी नरवाल ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले जिला के पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। जिन पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया है, उनमें ईएएसआई नरेश सिंह, ईएएसआई सूच्चा सिंह, ईएचसी कुलदीप, ईएचसी सूरजीत व ईएचसी सुभाष शामिल है।
आरक्षण आंदोलन के मद्देनजर गत शनिवार को फतेहाबाद में मॉक ड्रिल करने के उपरान्त जिला में फ्लैग मार्च निकाला गया था। इस दौरान इन पांचों पुलिसकर्मियों को ड्यूटी में कौताही के चलते निलंबित कर दिया गया।
एसपी श्री नरवाल ने जिला के सभी पुलिस कर्मियों को सख्त निर्देश दिए है कि वे पूरी कत्र्तव्य निष्ठा के साथ सजग रहते हुए अपनी ड्यूटी करें। ड्यूटी में कौताही को किसी भी स्तर पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण आंदोलन के मद्देनजर जिला में शांति व्यवस्था को कायम रखते हुए आमजन मानस की सुरक्षा करना पुलिस दायित्व है। इसलिए सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इस दायित्व का पूरी जिम्मेवारी के साथ निर्वहन करें।
10 जिलों में धारा 144 लागू
Jat Reservation Protest
- फोटो : अमर उजाला
उधर, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने आज से प्रदेश भर में धरना शुरु कर दिया है। धरने में गुरुग्राम, मेवात व पंचकूला को शामिल नहीं किया गया है। पिछले आंदोलन में फजीहत झेल चुकी सरकार भी इस बार आंदोलन से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है। रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार समेत 10 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है।
संवेदनशील जिलों में पुलिस के साथ अर्ध सैनिक बलों ने मोर्चा संभाल लिया है। मुनक नहर, रेलवे और बस स्टेशनों पर कड़ी चौकसी रखी जा रही है। शहरों में जगह-जगह नाकाबंदी कर दी गई है। शनिवार को सुरक्षा बलों ने कई जगह फ्लैग मार्च कर जनता में सुरक्षा के प्रति विश्वास जगाने की कोशिश की। प्रशासन ने कानून हाथ में लेने वालों, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सरकार वादा करने के बाद मांगें नहीं मान रही : यशपाल
जाट आरक्षण को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से मांगें न माने जाने पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति रविवार से अनिश्चितकालीन धरने पर रहेगी। सरकार वादा करने के बाद भी उनकी मांगें नहीं मान रही है। इस कारण ये कदम उठाया जा रहा है। जो लोग आंदोलन को खत्म करने या समझौते को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे हैं, वह सरकार के एजेंट हैं और आंदोलन को सफल नहीं होने देना चाहते हैं।- यशपाल मलिक, अध्यक्ष अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति।
ये हैं मुख्य मांगे
Jat Reservation Protest
- फोटो : फाइल फोटो
ये हैं मुख्य मांगे
- हरियाणा में अध्यादेश लाकर जाट जाति को पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया जाए। उसके बाद विधानसभा के सत्र में बिल लाकर हरियाणा के जाटों को आरक्षण दिया जाए।
-केंद्रीय स्तर पर जाटों को आरक्षण के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल लाकर बजट सत्र में प्रदेश और केंद्र सरकार की ओबीसी सूची में व्याप्त विसंगतियों को दूर किया जाए।
- हरियाणा में पिछले आंदोलन के दौरान गोली चलाने वाले आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
- आंदोलन में शहीद हुए परिवारों को उचित मुआवजा एवं उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए।
- पिछले और वर्तमान आंदोलन में दर्ज सभी मुकदमों को वापस लिया जाए और जेल में बंद युवाओं को रिहा किया जाए।